Saturday, October 24, 2026
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माघ मेले में मुसलमानों की एंट्री पर बयानबाजी, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले- साधु-संत नफरत नहीं, भाईचारा बढ़ाएं

प्रयागराज/बरेली। प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेले को लेकर साधु-संतों द्वारा मुसलमानों की एंट्री पर पाबंदी की मांग के बाद सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस पूरे मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए साधु-संतों से भाईचारा और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने की अपील की है।

बरेली में शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि माघ मेला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने के लिए होते हैं। ऐसे मेलों से इंसानियत, मानवता और आपसी प्रेम का संदेश जाना चाहिए, लेकिन कुछ साधु-संतों के बयान समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

मौलाना ने कहा कि माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है और इसी दौरान यह बात सामने आई है कि साधु-संतों की बैठक में मुसलमानों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय के लोगों को इस तरह से अलग करना इंसानियत के खिलाफ है और इससे समाज में विभाजन पैदा होता है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साधु-संत और धर्मगुरु समाज के मार्गदर्शक होते हैं। उनका कर्तव्य है कि वे लोगों के दिलों को जोड़ें, न कि उन्हें तोड़ने वाली बातें करें। मौलाना ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से देश की गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचता है और आपसी भाईचारे की भावना कमजोर होती है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आगे कहा कि हर त्योहार और धार्मिक आयोजन का मकसद प्रेम, शांति और एकता का संदेश देना होता है। ऐसे में साधु-संतों को चाहिए कि वे माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों को समाज को जोड़ने का जरिया बनाएं।

अंत में उन्होंने सभी साधु-संतों से अपील करते हुए कहा कि लोगों के बीच प्यार-मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे को बढ़ावा दें। भारत की साझा संस्कृति और तहजीब को मजबूत करें, ताकि देशभर के लोगों के दिल एक-दूसरे से जुड़े रहें और समाज में सौहार्द बना रहे।

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