Tuesday, October 27, 2026
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महाशिवरात्रि विशेष: उत्तराखंड का लाखामंडल, जहां कण-कण में शिव और गांव भर में लाखों शिवलिंग

देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की तपोभूमि माना जाता है। यहां की वादियां, पर्वत, नदियां और वन शिव भक्ति से ओत-प्रोत हैं। ऐसी ही एक दिव्य और ऐतिहासिक शिवस्थली है लाखामंडल, जिसे ‘लाखों शिवलिंगों का गांव’ कहा जाता है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस प्राचीन धाम की महत्ता और भी बढ़ जाती है।

विकासनगर क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर स्थित लाखामंडल न केवल धार्मिक, बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। मान्यता है कि यहां स्थित एक प्राचीन शिवलिंग करोड़ों वर्ष पुराना है, जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन होने की आस्था श्रद्धालुओं में प्रचलित है। इसी विश्वास के चलते देश-विदेश से शिवभक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

लाखामंडल का प्रमुख आकर्षण आठवीं शताब्दी में निर्मित प्राचीन लाखेश्वर मंदिर परिसर है। इस परिसर में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग सवा लाख शिवलिंग स्थापित हैं। ‘लाख’ का अर्थ लाख और ‘मंडल’ का अर्थ लिंग होने के कारण इस स्थल का नाम लाखामंडल पड़ा। हर ओर फैली हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य इस तीर्थ को विशेष बनाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद पुराण के केदारखंड में उल्लेख मिलता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां लाखों शिवलिंगों की स्थापना की थी। मंदिर की वास्तुकला भी केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती मानी जाती है, जो इसकी प्राचीनता और भव्यता को दर्शाती है। गर्भगृह में भगवान शिव माता पार्वती और परिवार सहित विराजमान हैं।

मंदिर परिसर में पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, दुर्गा, विष्णु, भैरव, सरस्वती, सूर्य और हनुमान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां मौजूद पदचिह्नों को माता पार्वती के चरणचिह्न माना जाता है, जिनके दर्शन को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर लाखामंडल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। आस्था, इतिहास और प्रकृति के अद्भुत संगम के कारण यह प्राचीन शिवधाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान रखता है।

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