Wednesday, May 13, 2026
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NEET UG परीक्षा रद्द होने पर छात्रों में आक्रोश, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य बोले- युवाओं के सपनों के साथ हो रहा मजाक

देहरादून। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद उत्तराखंड समेत पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद एनटीए ने परीक्षा निरस्त कर दोबारा कराने की घोषणा की है। इस फैसले से लाखों छात्र मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में आ गए हैं।

उत्तराखंड में भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों में गहरा रोष है। छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं ने उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी को लेकर चिंता जता रहे हैं।

इसी मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नीट यूजी परीक्षा रद्द होना युवाओं के सपनों के साथ सीधा मजाक है। उत्तराखंड सहित पूरे देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा सरकारें युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने सरकार की नीति और नीयत दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हर बार केवल दिखावटी जांच, बड़ी-बड़ी घोषणाएं और खोखले आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। उन्होंने सरकार से आत्ममंथन करने की जरूरत बताते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या देश के युवाओं के साथ न्याय हो रहा है।

यशपाल आर्य ने कहा कि परीक्षा रद्द होने का सबसे बड़ा असर उन करीब 23 लाख छात्रों पर पड़ेगा, जिन्हें अब दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। देश के 552 शहरों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों तक छात्रों को फिर से यात्रा करनी होगी, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दोबारा परीक्षा आयोजन में लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल की अतिरिक्त खपत होगी और करोड़ों रुपये का खर्च भी आएगा।

छात्र संगठनों और अभिभावकों ने भी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों से देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।

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