हल्द्वानी की जिस जेल में सुल्ताना डाकू रहा, उसे तोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके लिए जेल अधीक्षक ने प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा है। इस जेल के ध्वस्त होते ही इससे जुड़ी पुरानी यादें भी खत्म हो जाएंगी। अंग्रेजों द्वारा जेल में लगाए गए उपकरणों की नीलामी भी की जाएगी।
जेल अधीक्षक सतीश सुखीजा ने बताया, मुख्य परिसर में ही अंग्रेजों के समय में बनी जेल स्थित है। 1903 में अंग्रेजों के समय में बनी इस जेल को तोड़ने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। यह जेल पूरी तरह खंडहर बन चुकी है, इसकी कुछ दीवारें ही बची हैं। जेल परिसर में तीन नए बैरक बनने हैं, इसके अलावा अन्य कई नए काम होने हैं। इस जेल में अंग्रेजों के समय लगे हुए उपकरणों को नीलाम करने की योजना है। जेल में कैदियों, बंदियों की क्षमता अधिक हो चुकी है, इसलिए उनके लिए बैरक बनने अति आवश्यक हैं। इसके लिए शासन से बजट भी मिल चुका है। वहीं बात करें अंग्रेजों के समय बने अन्य जेलों की तो कुमाऊं के अल्मोड़ा में 1872 में बना जेल अब भी ठीक हालत में है। हल्द्वानी के अंग्रेजों के समय बने जेल में सुल्ताना डाकू रहा है। इसके अलावा इसमें कई फ्रीडम फाइटर, आंदोलनकारी भी रहे हैं। जेल के टूटते ही पुरानी यादें भी खत्म हो जाएंगी।