Wednesday, October 28, 2026
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चारधाम सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: केदारघाटी में बिना एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम के उड़ान भरते हैं हेलीकॉप्टर, दस हो चुके क्रैश

जून 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ तक पहुंच के लिए प्रदेश सरकारों ने हेलीकॉप्टर सेवा को बढ़ावा तो दिया लेकिन सुरक्षित हवाई सेवा को लेकर कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं। आज तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम तक स्थापित नहीं हो किया गया है, जिससे यहां हवा की दशा और दबाव की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। ऐसे में कभी भी हवाई दुर्घटना का कारण बन सकता है। बावजूद यूकाडा व शासन गंभीर नहीं हैं। समुद्रतल से 11750 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ मेरू-सुमेरू पर्वत की तलहटी पर विराजमान है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक गहरी संकरी घाटी है, जिससे गुजरकर हेलीकॉप्टर केदारनाथ पहुंचते हैं। यहां हल्की बारिश में चारों तरफ कोहरा छाने की समस्या आम है, जो यात्राकाल में अधिक रहती है। बावजूद, हेलीकॉप्टर की उड़ान बेधड़क होती आ रही है। आपदा के बाद से बीते सात वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमति शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और बड़े नौकरशाह भी हेलीकॉप्टर से केदारनाथ आते रहे हैं। बावजूद सुरक्षित हवाई सेवा को लेकर इस विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र में कोई इंतजाम नहीं हैं।
उत्तराखंड शासन भी इस दिशा में गंभीर नजर नहीं आया
यहां हवा की दिशा और दबाव की जानकारी सही से नहीं मिल पाती है, लेकिन केदारनाथ पुनर्निर्माण के दौरान भी यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम की स्थापना तो दूर किसी ने आज तक इस विषय पर कोई चर्चा तक नहीं की है। हैरत यह है कि नागरिक उड्डयन विभाग, उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथह्यॉरिटी (यूकाडा) और उत्तराखंड शासन भी इस दिशा में कभी गंभीर नजर नहीं आया है। इन हालात में यात्राकाल में केदारनाथ में एमआई-26 हेलीपैड पर झंडी लगाकर हवाई कंपनियों के कर्मचारी हवा की दिशा का अनुमान लगाकर अपने-अपने हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग और टेकऑफ कराते हैं।
दस हेलीकॉप्टर हो चुके क्रैश
वर्ष 2010 से 2018 तक केदारनाथ क्षेत्र में सात हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुकी हैं, जिसमें सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। इन हादसों में सेना के 20 जवानों सहित 23 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, सात लोग घायल हो गए थे। यही नहीं, लैडिंग और टेकऑफ के दौरान भी केदारनाथ में बीते छह वर्षों में चार हेलीकॉप्टरों का हवा के दबाव के चलते अनियंत्रित होने से संतुलन बिगड़ गया था। गनीमत रही कि इस दौरान किसी भी यात्री को नुकसान नहीं पहुंचा।
दोएम दर्जे के हेलीकॉप्टर भरते उड़ान
केदारनाथ यात्रा में निजी कंपनियों द्वारा 80 व 90 के दशक में निर्मित सिंगल इंजन वाले हेलीकॉप्टर संचालित किए जाते रहे हैं। इस संबंध में बीते वर्षें में कई यात्री प्रशासन से शिकायतें भी कर चुके हैं। केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टरों की गुणवत्ता के साथ ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम को लेकर शासन के माध्यम से यूकाडा को पत्र भेजा जा रहा है। सभी हेली कंपनियों को भी अलग से पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। — मनुज गोयल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग

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