Wednesday, May 20, 2026
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ऋषिकेश रेल हादसे का बड़ा खुलासा: बिना लोको पायलट के चल पड़ी उज्जैनी एक्सप्रेस, शंटिंग मास्टर ने हटाई थी चेन और गुटके

ऋषिकेश में सोमवार देर रात हुए उज्जैनी एक्सप्रेस हादसे की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि हादसे के समय ट्रेन में लोको पायलट मौजूद नहीं था। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, शंटिंग मास्टर ने जीरो प्रेशर की स्थिति में खड़ी ट्रेन से चेन और गुटके हटा दिए थे, जिसके बाद ढलान पर खड़ी ट्रेन स्वतः चल पड़ी और हादसे का शिकार हो गई।

गौरतलब है कि योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित खांड गांव क्षेत्र में लक्ष्मीबाई नगर-योग नगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस (14310) के इंजन समेत तीन कोच पटरी से उतर गए थे। हादसे के दौरान ट्रेन की रफ्तार अधिक होने के कारण कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया और दिल्ली व मुरादाबाद मंडल से वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।

लोको पायलट के बयान से खुला राज

सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद लोको पायलट और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। इस दौरान लोको पायलट ने अधिकारियों को बताया कि घटना के समय वह ट्रेन में मौजूद ही नहीं था। यह सुनकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।

पूछताछ में सामने आया कि ट्रेन को मेंटेनेंस और वाशिंग लाइन में ले जाने के लिए यार्ड की लाइन नंबर 10 में खड़ा किया गया था। ट्रेन को मंगलवार सुबह 6:15 बजे इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर के लिए रवाना होना था। इससे पहले ही हादसा हो गया।

जीरो प्रेशर में हटाए गए गुटके और चेन

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि ट्रेन कई घंटों से यार्ड में खड़ी थी, जिसके चलते उसके ब्रेकिंग सिस्टम का प्रेशर पूरी तरह खत्म हो चुका था। इसी दौरान शंटिंग मास्टर ने ट्रेन के गुटके और चेन हटा दिए।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यार्ड में लगभग 250 मीटर की दूरी पर एक मीटर का ढलान है। जैसे ही सुरक्षा उपकरण हटाए गए, ट्रेन धीरे-धीरे खिसकने लगी और कुछ ही समय में उसने रफ्तार पकड़ ली। नियंत्रण न होने के कारण इंजन और तीन कोच पटरी से उतर गए।

15 से 20 मिनट में बनता है ब्रेक प्रेशर

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि किसी भी ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम एयर प्रेशर पर आधारित होता है। यदि ट्रेन लंबे समय तक खड़ी रहती है तो लगभग चार घंटे में ब्रेक का प्रेशर खत्म हो जाता है।

ऐसी स्थिति में इंजन चालू करने के बाद दोबारा पर्याप्त प्रेशर बनने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। अधिकारियों का कहना है कि लोको पायलट के इंजन में सवार होकर प्रेशर बनाने से पहले ही चक्कों को खोल दिया गया, जिससे ट्रेन स्वतः चल पड़ी।

जांच के लिए बनी उच्च स्तरीय ज्वाइंट कमेटी

रेलवे प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए उच्च स्तरीय ज्वाइंट कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

मुरादाबाद मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव ने बताया कि कमेटी सभी तकनीकी और मानवीय पहलुओं की जांच कर रही है। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

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