Sunday, October 25, 2026
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Roorkee News: गोशाला से बनी ऊर्जा क्रांति, 40 घरों तक पहुंच रही गोबर गैस; अब गांव में बनेगी बिजली

हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र के हलजौरा गांव में एक अनोखी पहल ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर सामने आई है। यहां की गोशाला अब सिर्फ गोवंश संरक्षण का केंद्र नहीं रही, बल्कि गांव की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला सफल मॉडल बन चुकी है। गोबर गैस संयंत्र के जरिए गांव के 40 घरों तक गैस पहुंचाई जा रही है, जिससे एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है। अब ग्राम पंचायत गांव में बिजली उत्पादन की दिशा में भी काम शुरू करने जा रही है।

इब्राहिमपुर मसाई ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम ने बताया कि बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट को देखते हुए उन्होंने दो वर्ष पहले गोबर गैस संयंत्र लगाने की योजना बनाई थी। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन स्वजल हरिद्वार के अधिकारियों से संपर्क कर विस्तृत परियोजना तैयार की गई। अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2023 में स्वजल निधि से ग्राम पंचायत को 20 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई।

इस परियोजना के तहत लगभग एक बीघा भूमि में बड़ा गड्ढा बनाकर उसे भीतर से पक्का किया गया। इसके ऊपर एयर टाइट लोहे का डाइजेस्टर चैंबर तैयार किया गया, जिसमें गोबर से गैस तैयार होती है। गैस बनने के बाद पाइपलाइन के माध्यम से सीधे गांव के 40 घरों तक पहुंचाई जा रही है। ग्राम प्रधान ने बताया कि संयंत्र के रखरखाव और विस्तार के लिए प्रत्येक परिवार हर महीने 300 रुपये ग्राम पंचायत को जमा कर रहा है।

ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम के अनुसार अब अगला लक्ष्य गांव के लिए बिजली उत्पादन करना है। इसके लिए एक नई परियोजना तैयार की गई है, जिसके तहत गोशाला में मौजूद बैल और बछड़ों की मदद से बिजली उत्पादन करने वाली टरबाइन चलाई जाएगी। इससे गांव ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

गोशाला की खास बात यह है कि यहां कुल 51 गोवंश हैं, जिनमें 40 बछड़े और बैल शामिल हैं। बाकी 11 गायों में से केवल एक गाय ही दूध देती है। इसके बावजूद गोबर गैस और जैविक खाद उत्पादन के जरिए गोशाला आत्मनिर्भर बनी हुई है। ग्राम प्रधान ने बताया कि यदि गोशाला नहीं होती तो गोबर बाहर से मंगवाना पड़ता, जिससे परिवहन और डीजल पर अतिरिक्त खर्च आता।

गोबर गैस संयंत्र से निकलने वाली जैविक खाद की मांग भी लगातार बढ़ रही है। किसान इस खाद को हाथों-हाथ खरीदकर ले जा रहे हैं। अब ग्राम पंचायत वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मॉडल देश के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां गोसेवा और स्वच्छ ऊर्जा को एक साथ जोड़कर आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।

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