Monday, March 2, 2026
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Roorkee: शिक्षिका रेखा बुडकोटी की मेहनत से बदला सफीपुर स्कूल, बना शिक्षा का आदर्श मॉडल

रुड़की: संघर्ष और समर्पण से बदली सरकारी विद्यालय की तस्वीर, सफीपुर स्कूल बना शिक्षा का मॉडल

रुड़की। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद एक शिक्षिका की लगन और नवाचार ने सरकारी विद्यालय की पहचान बदलकर रख दी। रुड़की क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सफीपुर ने आज शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में अपनी पहचान बना ली है। इस सकारात्मक बदलाव के केंद्र में शिक्षिका रेखा बुडकोटी की मेहनत और समर्पण अहम भूमिका निभा रहा है।

कुछ समय पहले तक यह विद्यालय संसाधनों की कमी और छात्रों की कम उपस्थिति जैसी समस्याओं से जूझ रहा था, लेकिन आज यहां आधुनिक शिक्षण सुविधाएं और सक्रिय शैक्षणिक वातावरण देखने को मिल रहा है।


चुनौतियों के बीच लिया बदलाव का संकल्प

विद्यालय में प्रभारी पद संभालने के बाद शिक्षिका रेखा बुडकोटी ने तय किया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। शुरुआत में उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। बच्चों की पढ़ाई में कम रुचि, अभिभावकों की उदासीनता और बुनियादी सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौतियां थीं।

लगातार प्रयासों और सकारात्मक सोच के साथ उन्होंने विद्यालय में सुधार की दिशा में काम शुरू किया, जिसका परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगा।


स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा से बढ़ी बच्चों की रुचि

शिक्षिका के प्रयासों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से विद्यालय में कई नई सुविधाएं विकसित की गईं। स्कूल में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, खेल मैदान और खेल उपकरण उपलब्ध कराए गए। साथ ही स्कूल की दीवारों पर शैक्षिक और प्रेरणादायक चित्र बनाए गए, जिससे बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, गणित और सामान्य ज्ञान सिखाया जाने लगा।

डिजिटल माध्यमों के उपयोग से पढ़ाई को रोचक बनाया गया, जिसका सकारात्मक असर छात्रों की उपस्थिति और प्रदर्शन पर साफ दिखाई देने लगा है।


अभिभावकों की सोच में भी आया बदलाव

पहले जहां कई अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय नहीं भेजते थे, वहीं अब वे स्वयं बच्चों की पढ़ाई में रुचि लेने लगे हैं। विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होने से शिक्षा का माहौल मजबूत हुआ है।


शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी विशेष ध्यान

विद्यालय में स्वच्छता अभियान, पौधारोपण और नैतिक शिक्षा जैसी गतिविधियों को भी नियमित रूप से शामिल किया गया है। इन प्रयासों से स्कूल परिसर स्वच्छ, आकर्षक और प्रेरणादायक बन गया है।

आज राजकीय प्राथमिक विद्यालय सफीपुर आसपास के क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है और यह साबित कर रहा है कि समर्पण, नवाचार और सकारात्मक सोच से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली जा सकती है।

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