काशीपुर। काशीपुर व जसपुर सिंचाई खंड में दैवी आपदा और एआर की मद में किए गए कथित घोटाले की जांच पूरी हो गई है। समिति ने जांच रिपोर्ट विभाग के मुख्य अभियंता को सौंप दी है। जांच के दायरे में आए एक एसडीओ और चार अवर अभियंताओं का चार्ज छीनकर उन्हें संबंधित डिविजन से संबद्ध कर दिया गया है। समिति की रिपोर्ट पर मुख्यालय से एक-दो दिन में कार्रवाई होने की उम्मीद है।
सिंचाई विभाग के ठेकेदार मुखर्जी नगर निवासी अशोक शर्मा ने एक माह पूर्व सीएम पोर्टल, प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग को शिकायत दर्ज कराई थी कि सिंचाई खंड काशीपुर और जसपुर में एआर हेड और दैवी आपदा मद में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धांधली की गई है। अधिकारियों ने ठेकेदारों से सांठगांठ कर माइनरों और नहरों की सफाई कराए बगैर रकम हड़प ली। उन्होंने पूर्व में निलंबित रहे चुके ईई समेत दो एसडीओ और चार जेई पर आरोप लगाए थे।सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने अधीक्षण अभियंता को जांच के आदेश दिए थे। एसई पीके दीक्षित ने बीती 27 जुलाई को तुमड़िया टीवी फीडर से ढेला नदी तक आन तीन किमी माइनर का निरीक्षण किया। उन्होंने माइनर के बीच पड़ने वाली साइफन को भी देखा। नहरों और माइनर की कहीं कोई सफाई होना नहीं पाई गई। मौके पर ऊंची-ऊंची घास खड़ी पाई गई।
एसई दीक्षित की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मुख्य अभियंता ने उनकी अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की। समिति में काशीपुर खंड के एई दीपक शर्मा और सिंचाई कार्यमंडल, रुद्रपुर के एई ऋषिराज चक्रपाणी को भी शामिल किया गया। समिति ने संबंधित कार्यों के वर्क आर्डर, मस्टररोल व अन्य अभिलेखों की विस्तृत पड़ताल की। एसई दीक्षित ने बताया कि जांच रिपोर्ट विभाग के मुख्य अभियंता शुक्ल को सौंप दी गई है। मुख्यालय स्तर पर ही इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
पूर्व में भी निलंबित रह चुके हैं ईई पुरुषोत्तम
काशीपुर। कथित घोटाले के चलते जांच के दायरे में आए काशीपुर सिचाई खंड के अधिशाषी अभियंता पुरुषोत्तम पहले भी निलंबित किए जा चुके हैं। उन्हें सिंचाई खंड हरिद्वार के कार्यों को टुकड़ों में बांटने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की नियमित जांच न कराने के लिए फरवरी 2020 में निलंबित किया गया था। तब उन्हें सिंचाई खंड हरिद्वार से संबद्ध किया गया है। बाद में मई 2020 में उन्हें बहाल कर दिया गया था।