Friday, January 16, 2026
Homeउत्तराखंडसेतु आयोग: इसी माह तैयार होगी उत्तराखंड की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति,...

सेतु आयोग: इसी माह तैयार होगी उत्तराखंड की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने पर जोर

उत्तराखंड को विकसित और सशक्त राज्य बनाने की दिशा में उत्तराखंड सेतु आयोग लगातार प्रभावी पहल कर रहा है। नीति निर्माण के साथ-साथ जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम देने वाले कार्यों के जरिए आयोग राज्य के विकास एजेंडे को नई दिशा दे रहा है। इसी क्रम में प्रदेश की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति को इसी महीने अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है।

सेतु आयोग स्वास्थ्य सेवाओं, वन आधारित अर्थव्यवस्था और ठोस कूड़ा प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में नई नीतियों और गहन अध्ययन पर काम कर रहा है। इसके साथ ही पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी एक समग्र रणनीति तैयार की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी ने बताया कि राज्य की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे विकास मॉडल तैयार किए जा रहे हैं, जो टिकाऊ और समावेशी हों। उन्होंने कहा कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि सामाजिक सुधार, संस्थागत सशक्तिकरण और पर्यावरणीय संतुलन को भी साथ लेकर चलना होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए सेतु आयोग कृषि, डेयरी, पशुपालन और कौशल विकास को विकास की रीढ़ मान रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से पशुपालन एवं डेयरी विभाग के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत डेयरी सेक्टर के साथ आंचल ब्रांड को भी आगे बढ़ाया जाएगा। यह रणनीति माह के अंत तक तैयार होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों का पीछे हटना, ग्लेशियल झीलों की संख्या बढ़ना, खेती की जमीन का खाली होना और भूकंपीय जोखिम जैसी चुनौतियों को अवसर के रूप में देखने की जरूरत है। सही नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से इन समस्याओं को विकास के नए मॉडल में बदला जा सकता है।

किसानों के लिए कलेक्शन सेंटर और ग्रामीण केंद्र

सेतु आयोग और कृषि विभाग की पहल से चकराता और जौनपुर ब्लॉक में महिंद्रा ग्रुप के सहयोग से आधुनिक सिंचाई आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के चार स्थानों पर किसानों के लिए कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। तीन स्थानों पर आधुनिक ग्रामीण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे, जिनका संचालन स्वयं सहायता समूहों या किसान उत्पादक संगठनों द्वारा किया जाएगा।

पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेतु आयोग, पंचायती राज विभाग और क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से ग्राम प्रधानों के प्रशिक्षण की पहल भी की जा रही है, जिससे ग्राम स्तर पर सुशासन को मजबूती मिलेगी।

कौशल विकास में दिख रहे सकारात्मक परिणाम

कौशल विकास के क्षेत्र में भी सेतु आयोग की पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में टाटा समूह द्वारा संचालित होटल उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षित युवाओं को टाटा सहित अन्य बड़ी कंपनियों में रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। आयोग की आने वाले समय में ऐसे और प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments