Friday, March 6, 2026
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Uttarakhand Census: जनगणना से सामने आएगी घोस्ट विलेज की वास्तविक संख्या, पलायन के बाद खाली गांवों का होगा आकलन

जनगणना से स्पष्ट होगी उत्तराखंड के घोस्ट विलेज की संख्या

देहरादून। उत्तराखंड में वर्षों से जारी पलायन के प्रभाव का वास्तविक आंकड़ा अब आगामी जनगणना के माध्यम से सामने आएगा। राज्य में 25 अप्रैल से शुरू होने वाली जनगणना प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि पलायन के कारण प्रदेश में कितने गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं, जिन्हें आम तौर पर घोस्ट विलेज कहा जाता है।

जनगणना निदेशालय ने निर्णय लिया है कि राज्य के सभी गांवों की विस्तृत गणना की जाएगी। इससे न केवल खाली हो चुके गांवों की संख्या सामने आएगी, बल्कि पलायन और रिवर्स पलायन की स्थिति का भी सही आकलन हो सकेगा।


2011 की जनगणना में 1048 गांव पाए गए थे खाली

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में कुल 16,793 गांव दर्ज किए गए थे। इनमें से 1048 गांव ऐसे थे जो पलायन के कारण पूरी तरह खाली हो चुके थे।

प्रदेश में पलायन लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक मुद्दा रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने पलायन आयोग का गठन किया था, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और बुनियादी सुविधाएं बढ़ाकर लोगों को वापस गांवों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहा है।

हालांकि हाल के वर्षों में कुछ क्षेत्रों में रिवर्स पलायन की बात सामने आई है, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, इसका पता नई जनगणना के आंकड़ों से ही चल सकेगा।


दो चरणों में होगी जनगणना प्रक्रिया

जनगणना निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी।

  • पहला चरण: 25 अप्रैल से 24 मई के बीच भवन गणना और मकान सूचीकरण

  • दूसरा चरण: अगले वर्ष 9 फरवरी से 28 फरवरी के बीच जनसंख्या गणना

उन्होंने बताया कि जनगणना की टीमें प्रदेश के हर गांव तक पहुंचकर सर्वेक्षण करेंगी। वर्ष 2011 में राज्य में 1048 गांव गैर आबाद दर्ज किए गए थे। लगभग 16 वर्ष बाद अब यह पता चलेगा कि राज्य में घोस्ट विलेज की संख्या में कितना इजाफा हुआ है।


2011 में जिलावार घोस्ट विलेज की स्थिति

जिला कुल गांव घोस्ट विलेज
उत्तरकाशी 707 13
चमोली 1246 76
रुद्रप्रयाग 688 35
टिहरी 1862 88
देहरादून 748 17
पौड़ी 3473 331
पिथौरागढ़ 1675 103
बागेश्वर 947 73
अल्मोड़ा 2289 105
चंपावत 717 55
नैनीताल 1141 44
ऊधमसिंह नगर 688 14
हरिद्वार 612 94

इन आंकड़ों के अनुसार पौड़ी जिले में सबसे अधिक 331 गांव घोस्ट विलेज के रूप में दर्ज किए गए थे।


देहरादून में मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शुरू

जनगणना की तैयारियों के तहत 9 मार्च से देहरादून में मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मकान सूचीकरण, मकान गणना और डेटा एंट्री से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ ही मोबाइल एप और पोर्टल के माध्यम से डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया भी सिखाई जाएगी। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर बाद में प्रदेशभर में जनगणना से जुड़े कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे।


नई जनगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि उत्तराखंड में पलायन का प्रभाव कितना गहरा है और कितने गांव अब भी आबादी का इंतजार कर रहे हैं।

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