देहरादून। उत्तराखंड में भूकंप की बढ़ती घटनाओं ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल महीने के दौरान राज्य में अब तक 10 बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। हालांकि इन सभी भूकंपों की तीव्रता कम रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस महीने सबसे पहला भूकंप 11 अप्रैल को पौड़ी गढ़वाल में दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.3 और 3.6 रही। इसके बाद 14 अप्रैल को पिथौरागढ़ जिले में 3.4 तीव्रता का भूकंप आया।
भूकंप के झटकों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 16 अप्रैल को एक बार फिर पिथौरागढ़ में 2.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। वहीं 19 अप्रैल को बागेश्वर जिले में महज एक घंटे के भीतर तीन बार धरती डोली। इस दौरान 2.8, 2.6 और 3.1 तीव्रता के झटके महसूस किए गए।
इसके अलावा 20 अप्रैल को बागेश्वर में 2.5 और पौड़ी गढ़वाल में 3.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। 21 अप्रैल को भी बागेश्वर जिले में 2.6 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत का कहना है कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में आता है। ऐसे में छोटी-छोटी भूकंपीय गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कम तीव्रता के भूकंप इस क्षेत्र में समय-समय पर आते रहते हैं और फिलहाल इनमें किसी विशेष पैटर्न के संकेत नहीं मिल रहे हैं। वहीं संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेश के अनुसार, पहले भी इस तरह के हल्के भूकंप दर्ज होते रहे हैं, इसलिए घबराने की बजाय जागरूक रहना अधिक जरूरी है।
सतर्कता ही सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए जागरूकता और तैयारी ही सबसे बड़ा उपाय है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपदा प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।