Friday, September 18, 2026
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Uttarakhand: गैस संकट से महंगी हुई चाय-नाश्ता, छोटे दुकानदारों ने बढ़ाए दाम, लकड़ी-कोयले का सहारा

देहरादून। प्रदेश में एलपीजी गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस संकट के कारण छोटे चाय-नाश्ते के दुकानदारों की लागत बढ़ गई है, जिसके चलते उन्होंने अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं कई छोटे दुकानदार अब गैस की जगह लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने को मजबूर हो गए हैं।

दरअसल, बाजार में गैस सिलिंडर की किल्लत के कारण छोटे कारोबारियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पर्याप्त गैस उपलब्ध न होने और कीमतें बढ़ने से चाय, समोसे और बिरियानी जैसे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर भी पड़ रहा है।

स्थानीय दुकानदार आशीष ने बताया कि पहले उनकी दुकान पर मिलने वाली चाय 10 रुपये में बिकती थी, लेकिन गैस महंगी होने और सिलिंडर की कमी के कारण अब चाय की कीमत बढ़ाकर 15 रुपये करनी पड़ी है। इसी तरह समोसे की कीमत भी 15 रुपये से बढ़ाकर 18 रुपये कर दी गई है।

वहीं बिरियानी बेचने वाले दुकानदार शुभम वर्मा ने बताया कि गैस संकट का असर उनके कारोबार पर भी पड़ा है। पहले 30 रुपये में मिलने वाली हाफ प्लेट बिरियानी अब 40 रुपये में बेची जा रही है, जबकि 50 रुपये की फुल प्लेट बिरियानी अब 60 रुपये में मिल रही है।

पारंपरिक तरीकों की ओर लौट रहे दुकानदार

गैस की कमी से परेशान कई छोटे दुकानदार अब पुराने पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने लगे हैं। छोले-भटूरे विक्रेता रामब्रिज का कहना है कि उन्होंने गैस सिलिंडर का इस्तेमाल काफी कम कर दिया है। अब वे घर पर लकड़ी और कोयले की मदद से खाना बनाते हैं और उसे दुकान पर लाकर गर्म करके ग्राहकों को परोसते हैं।

दुकानदारों का कहना है कि बड़े होटल और कैफे तो गैस सिलिंडर का स्टॉक रख लेते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के पास यह सुविधा नहीं होती। ऐसे में उन्हें अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

लगातार बढ़ती कीमतों और गैस की कमी के कारण कई छोटे ठेले और टपरी संचालकों के सामने अपनी दुकानें बंद करने की नौबत तक आ गई है, जिससे छोटे कारोबारियों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।

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