Friday, March 20, 2026
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Uttarakhand Labour Rules: अब श्रमिकों से 10 घंटे ही कराया जाएगा काम, न्यूनतम मजदूरी में बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च भी जोड़ा जाएगा

श्रम विभाग ने जारी किया मजदूरी संहिता नियमावली-2026 का मसौदा, एक माह में मांगे सुझाव

देहरादून। उत्तराखंड में श्रमिकों के कार्य घंटे और न्यूनतम मजदूरी तय करने की व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य के श्रम विभाग ने मजदूरी संहिता नियमावली-2026 का मसौदा जारी कर दिया है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक ही काम कराया जा सकेगा। इसके बाद काम लेने पर नियोक्ता को ओवरटाइम का अलग से भुगतान करना अनिवार्य होगा।

सरकार ने पहली बार न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए वैज्ञानिक फार्मूला लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत श्रमिकों की मूलभूत जरूरतों के साथ-साथ उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन पर होने वाले खर्च को भी मजदूरी निर्धारण में शामिल किया जाएगा। श्रम विभाग ने इस मसौदे पर आम जनता और संबंधित संगठनों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।

काम के घंटों को लेकर स्पष्ट प्रावधान

नई नियमावली में श्रमिकों के काम के घंटे और विश्राम को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

  • किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे ही काम लिया जा सकेगा।

  • सप्ताह में कुल कार्य अवधि 48 घंटे से अधिक नहीं होगी।

  • लगातार छह घंटे काम करने के बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य होगा।

यदि कोई श्रमिक निर्धारित समय से अधिक काम करता है, तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर पर ओवरटाइम भुगतान दिया जाएगा।

वैज्ञानिक आधार पर तय होगी न्यूनतम मजदूरी

प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब न्यूनतम मजदूरी अनुमान के आधार पर नहीं बल्कि तय मानकों के आधार पर निर्धारित की जाएगी। इसमें श्रमिक परिवार की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।

इन मानकों में शामिल हैं:

  • प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन की आवश्यकता

  • एक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़ा

  • भोजन और कपड़ों पर होने वाले कुल खर्च का 10 प्रतिशत आवास किराया

  • बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन के लिए कुल मजदूरी का 25 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सा

परिवार की परिभाषा का दायरा बढ़ाया

नई नियमावली में श्रमिक परिवार की परिभाषा को भी विस्तारित किया गया है। इसके तहत पति-पत्नी, 21 वर्ष तक के आश्रित पुत्र, अविवाहित पुत्रियां, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम संतान और आश्रित माता-पिता को परिवार में शामिल किया गया है।

विशेष रूप से महिला श्रमिकों के मामले में सास-ससुर को भी परिवार का हिस्सा माना जाएगा, जिससे श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच सकेगा।

श्रमिकों की नई श्रेणी भी जोड़ी गई

कौशल के आधार पर अब तक श्रमिकों को अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल तीन श्रेणियों में रखा जाता था। श्रम विभाग ने अब इसमें चौथी श्रेणी ‘अत्यधिक कुशल’ भी जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।

इस श्रेणी में वे श्रमिक शामिल होंगे जिनके पास विशेष तकनीकी दक्षता, उत्कृष्ट कार्य क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता होगी। ऐसे श्रमिकों को उनके कौशल के अनुसार अधिक मजदूरी और अन्य लाभ दिए जाएंगे।

सुझाव भेजने के लिए ई-मेल

श्रम विभाग ने इस मसौदे पर सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक व्यक्ति 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव या आपत्तियां सचिव, श्रम विभाग या श्रम आयुक्त को ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।

ई-मेल:

सरकार का कहना है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर नियमावली में आवश्यक संशोधन कर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी, जिससे राज्य के श्रमिकों को बेहतर कार्य परिस्थितियां और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।

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