Tuesday, November 3, 2026
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उत्तराखंड: खाड़ी युद्ध की मार, देहरादून के रसोई का बजट बिगड़ा; ₹2300 पहुंचा रिफाइंड का टिन

देहरादून। मध्य पूर्व (खाड़ी देशों) में गहराते युद्ध के बादलों ने अब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रसोई घर का जायका बिगाड़ना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बाधित होने के कारण स्थानीय बाजारों में रिफाइंड तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही रिफाइंड तेल के दामों में ₹100 तक की वृद्धि हो चुकी है।

रिफाइंड तेल के दामों में उछाल: एक नजर

बाजार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, रिफाइंड तेल की कीमतों ने आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण थोक और फुटकर दोनों दामों में तेजी आई है।

उत्पाद पहले की कीमत वर्तमान कीमत
रिफाइंड तेल (15 किलो टिन) ₹2200 ₹2300
रिफाइंड तेल (900 ML पैकेट) ₹105 ₹110

क्या कहते हैं बाजार के विशेषज्ञ?

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, रिफाइंड तेल की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक अस्थिरता है।

  • आढ़ती मनोज गोयल ने बताया कि थोक बाजार में 15 किलो वाले टिन की कीमत सीधे ₹100 बढ़ गई है। कुछ दिन पहले तक जो टिन ₹2200 में उपलब्ध था, वह अब ₹2300 के पार पहुंच रहा है।

  • व्यापारी विक्की गोयल के मुताबिक, देहरादून में रिफाइंड तेल की मुख्य आपूर्ति गुजरात से होती है, लेकिन सोयाबीन तेल के लिए भारत अमेरिका और अन्य विदेशी बाजारों पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की कमी और आयात शुल्क में बदलाव की आशंका ने स्थानीय दामों को प्रभावित किया है।

ड्राई फ्रूट्स पर भी मंडरा रहे हैं महंगाई के बादल

युद्ध का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में सूखे मेवों, विशेषकर पिस्ते की कीमतों में भी आग लग सकती है।

व्यापारी देवेंद्र साहनी के अनुसार, देहरादून के बाजारों में पिस्ते की सबसे ज्यादा आपूर्ति ईरान से होती है। चूंकि ईरान युद्ध के केंद्र में है, इसलिए वहां से होने वाली सप्लाई चेन कभी भी रुक सकती है। हालांकि अभी दाम स्थिर हैं, लेकिन व्यापारियों को डर है कि अगर स्टॉक खत्म हुआ और नई खेप नहीं आई, तो पिस्ता आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा।

स्थानीय जनता पर प्रभाव

अचानक हुई इस बढ़ोतरी से देहरादून के मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ गया है। त्यौहारी सीजन और शादी-ब्याह के कार्यक्रमों के बीच तेल की कीमतों में आए इस उछाल ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि खाड़ी देशों में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में अन्य आयातित वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।

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