Tuesday, November 3, 2026
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उत्तराखंड में तबादला प्रक्रिया शुरू, शिक्षकों के स्थानांतरण पर अनिश्चितता; सुगम-दुर्गम विवाद कोर्ट में लंबित

तबादला एक्ट के तहत प्रक्रिया शुरू, 31 मार्च तक कार्यस्थलों का चिह्नीकरण जरूरी

देहरादून: उत्तराखंड में तबादला एक्ट के तहत सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि प्रदेश के सबसे बड़े विभागों में शामिल शिक्षा विभाग में इस वर्ष भी शिक्षकों के तबादले होने पर अनिश्चितता बनी हुई है। सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के निर्धारण से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण शिक्षकों के स्थानांतरण फिलहाल अटक सकते हैं।

तबादला एक्ट के प्रावधानों के अनुसार सभी विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके तहत 31 मार्च तक विभागाध्यक्षों को तय मानकों के अनुसार कार्यस्थलों का चिह्नीकरण करना अनिवार्य है। लेकिन शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

तय समय-सारणी के अनुसार होना है स्थानांतरण

तबादला एक्ट के तहत हर साल एक अप्रैल तक मंडल और जिला स्तर पर स्थानांतरण समितियों का गठन किया जाना आवश्यक है। इसके बाद 15 अप्रैल तक सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के कार्यस्थलों, खाली पदों और स्थानांतरण के पात्र कर्मचारियों की सूची विभागीय वेबसाइट पर प्रदर्शित की जानी चाहिए।

हालांकि कुछ विभागों का कहना है कि शासन स्तर से औपचारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्थानांतरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं कार्मिक विभाग का कहना है कि विभागों को अलग से आदेश का इंतजार किए बिना निर्धारित समय-सारणी के अनुसार काम करना चाहिए।

कोर्ट में लंबित है सुगम-दुर्गम का मामला

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के अनुसार सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के आधार पर शिक्षकों के तबादलों पर फिलहाल कोर्ट की रोक लगी हुई है। इसी वजह से सामान्य प्रक्रिया के तहत शिक्षकों के तबादले नहीं किए जा सकते।

उन्होंने बताया कि धारा 27 के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के करीब 250 शिक्षकों के तबादलों का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा गया है, जिस पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

उत्तरकाशी के मामले से शुरू हुआ विवाद

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार उत्तरकाशी जिले में एक ही क्षेत्र के दो विद्यालयों को अलग-अलग श्रेणियों में दर्शाने का मामला सामने आया है। यहां एक जूनियर हाईस्कूल को दुर्गम क्षेत्र में जबकि उसी इलाके के प्राथमिक विद्यालय को सुगम क्षेत्र में दर्शाया गया है।

इस विसंगति को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जिसके बाद सुगम-दुर्गम के आधार पर शिक्षकों के तबादलों पर रोक लग गई।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी ने बताया कि यह मामला अभी न्यायालय में लंबित है और इसके निस्तारण के बाद ही शिक्षकों के तबादलों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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