देहरादून। उत्तराखंड में आज से पानी के बिलों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। उत्तराखंड जल संस्थान ने प्रदेश भर के उपभोक्ताओं के लिए जल दरों में लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। ऐसे में जिन घरों में जल संस्थान की पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति होती है, उन्हें अब पहले के मुकाबले ज्यादा भुगतान करना होगा।
जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि बुधवार से प्रभावी हो गई है और नए बिलों में इसका असर दिखाई देगा। विभाग द्वारा बताया गया कि पानी की दरों में यह संशोधन 2013 में तय किए गए बेस टैरिफ के आधार पर हर वर्ष किया जाता है।
पहले ज्यादा होती थी वृद्धि
अधिकारियों ने बताया कि 2013 की टैरिफ संरचना के अनुसार पहले निचले स्लैब में करीब नौ प्रतिशत और ऊपरी स्लैब में लगभग 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रावधान था। लेकिन वर्तमान में इसे घटाकर चार प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं पर अपेक्षाकृत कम आर्थिक बोझ पड़े।
इन दो आधारों पर बनता है पानी का बिल
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि पानी के बिलों का निर्धारण मुख्य रूप से दो आधारों पर किया जाता है। पहला हाउस टैक्स असेसमेंट, जिसके आधार पर उपभोक्ताओं को अलग-अलग स्लैब में रखा जाता है। दूसरा वॉल्यूमेट्रिक टैरिफ (लीटर के आधार पर), जिसमें उपभोक्ता द्वारा उपयोग किए गए पानी की मात्रा के अनुसार बिल जारी किया जाता है।
प्रदेश में करीब 50 हजार वॉल्यूमेट्रिक उपभोक्ता
विभाग के अनुसार पूरे उत्तराखंड में करीब 50 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनके पानी के बिल वॉल्यूमेट्रिक सिस्टम यानी पानी की वास्तविक खपत के आधार पर तय किए जाते हैं। नई दरें लागू होने के बाद इन उपभोक्ताओं के बिलों में भी चार प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।
जल संस्थान का कहना है कि पानी की आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और संचालन व रखरखाव की लागत को संतुलित करने के लिए समय-समय पर टैरिफ में संशोधन किया जाता है।