Tuesday, November 3, 2026
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उत्तराखण्ड में बनी फिल्मों को मिली पहचान, प्रतिभाओं के साथ फिल्म संस्कृति को मिल रहा सम्मान

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद् द्वारा प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। स्थानीय कलाकारों एवं तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने तथा राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद् द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद् द्वारा उत्तराखण्ड फिल्म नीति-2024 के तहत पहली बार उत्तराखण्ड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इन पुरस्कारों के माध्यम से वर्ष 2024 एवं 2025 में उत्तराखण्ड में निर्मित अथवा फिल्मांकित फिल्मों तथा उत्तराखण्ड की क्षेत्रीय बोलियों, हिंदी एवं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भारतीय भाषाओं में बनी फिल्मों को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही उत्कृष्ट कलाकारों, तकनीशियनों एवं फिल्म विधा से जुड़े अन्य रचनात्मक व्यक्तियों को भी सम्मान प्रदान किया जाएगा। पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन आवेदन 15 सितम्बर से 16 अक्टूबर 2026 तक किए जा सकेंगे।

फिल्म शूटिंग में उत्तराखण्ड का बढ़ता प्रभाव

उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र, नदियां, झीलें, जंगल, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक राज्य में 1,440 से अधिक फिल्मों की शूटिंगध्एनओसी से संबंधित गतिविधियां दर्ज की गई हैं। इससे राज्य में फिल्म निर्माण के साथ होटल, परिवहन, कैटरिंग, स्थानीय सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

नई फिल्म नीति और अनुदान से राज्य में फिल्मांकन को मिला प्रोत्साहन

राज्य सरकार द्वारा फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र फिल्मों को निर्धारित मानकों के अनुसार अनुदान प्रदान किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 52 फिल्मों को अनुदान दिया गया है। इनमें हिंदी के साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी एवं अन्य उत्तराखण्डी भाषाओं की फिल्में भी शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में अकेले 25 फिल्मों को अनुदान प्रदान किया गया।

नई फिल्म नीति-2024 में फिल्म शूटिंग के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था, विभिन्न प्रोत्साहन एवं अनुदान, फिल्म पुरस्कार, प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति, फिल्म सिटी और पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड को केवल शूटिंग लोकेशन तक सीमित न रखते हुए फिल्म निर्माण के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है।

राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड को मिली नई पहचान

उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर भी फिल्म-अनुकूल राज्य के रूप में पहचान मिली है। 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राज्य को डवेज थ्पसउ थ्तपमदकसल ैजंजम  तथा 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में डवेज थ्पसउ थ्तपमदकसल ैजंजम दृ ैचमबपंस डमदजपवद से सम्मानित किया गया। नैनीताल, मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, टिहरी, चकराता, चोपता, हर्षिल, औली, चारधाम क्षेत्र, जिम कॉर्बेट सहित गढ़वाल एवं कुमाऊं के अनेक क्षेत्र प्रमुख फिल्म शूटिंग स्थलों के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे व्यापक अवसर

फिल्म क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को अभिनय, तकनीकी कार्य, फिल्म निर्माण एवं अन्य संबंधित क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिल्म विधा के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति तथा क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहन देने जैसी पहल से राज्य की स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने बताया कि उत्तराखण्ड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 का पहला आयोजन स्थानीय फिल्मों, भाषाओं, कलाकारों और तकनीकी प्रतिभाओं को सम्मान एवं पहचान देने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से उत्तराखण्ड की फिल्म संस्कृति को नई दिशा देने के साथ राज्य की प्रतिभाओं और यहां की लोक संस्कृति एवं कथानकों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में बनी फिल्मों को पहचान, प्रतिभाओं को सम्मान और फिल्म संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तराखण्ड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 इसी प्रयास की महत्वपूर्ण कड़ी है।

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