रुद्रपुर। शहर को चंडीगढ़ जैसा संवारने के दावे बरसात के पानी में बहे जा रहे हैं। ड्रेनेज सिस्टम के अभाव से 10 मिनट की बारिश में ही शहर में जलभराव हो जाता है। इसका खामियाजा तीन लाख की आबादी को भुगतना पड़ता है। वर्षों पुरानी समस्या को दूर करने के बजाय सरकार जनता को आश्वासन की घुट्टी पिला रही है। शहर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से डीडी चौक, मुख्य बाजार, भूतबंगला, खेड़ा, कौशल्या इनक्लेव, जगतपुरा, ट्रांजिट कैंप आदि जगहों में जरा सी बारिश में जलभराव होने लगता है। नगर निगम का दावा है कि ड्रेनेज सिस्टम बनाने के लिए कई बार प्लान बनाए गए लेकिन हमेशा से ही प्लान विफल साबित हुए हैं। वर्ष 2020 में नगर निगम की ओर से चीन की एक नामी कंपनी से शहर में ड्रेनेज सिस्टम को लेकर सर्वे कराया गया था। सर्वे शुरू होने से पहले नगर निगम ने सीवर लाइन बिछाने का प्रस्तावित बजट 365 करोड़ रुपये निर्धारित किया। शहर का आधा सर्वे भी नहीं हुआ कि कोरोना संक्रमण ने दस्तक दे दी। उस दौरान चीन के उत्पादों के बहिष्कार के चलते नगर निगम ने भी चीन की कंपनी से सीवर लाइन के सर्वे का काम छीन लिया।
2800 करोड़ रुपये से 20 नगरों में बनेगा ड्रेनेज सिस्टम
रुद्रपुर। इस वर्ष एशियन डेवलेपमेंट बैंक की ओर से रुद्रपुर, किच्छा, हल्द्वानी समेत 20 नगरों में ड्रेनेज सिस्टम बनाने की पहल की जा रही है। रुद्रपुर में एडीबी की ओर से सर्वे भी कर लिया गया है। सर्वे के अनुसार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, स्ट्रांग वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीईटी प्लांट, शहर में नालियों का निर्माण आदि किए जाएंगे।
लोगों की पीड़ा
मुख्य बाजार में पानी की निकासी नहीं होने से बाजार में लबालब पानी भर जाता है। सीवर लाइन की सुविधा नहीं होने से दिक्कतें होती हैं। – राजकुमार भुसरी, व्यापारी।
नगर निगम की ओर से बाजार की नालियों की सफाई नहीं की जाती है। एक ही जगह कूड़ा इकट्ठा होने से बदबू फैलती है और नालियां भी चोक होती हैं। – राकेश कुमार, व्यापारी।
नालियों की सफाई नहीं होती है, ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। इससे सड़कें भी टूट रही हैं और असुविधा भी होती है। –सुधीर कुमार, व्यापारी।
नगर आयुक्त का पक्ष
ड्रेनेज सिस्टम बनाने के लिए एडीबी की ओर से सर्वे कर लिया गया है। एडीबी के इस प्रोजेक्ट में उत्तराखंड से रुद्रपुर, किच्छा, हल्द्वानी समेत 20 शहर शामिल हैं। कुल 2800 करोड़ रुपये खर्च कर ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा। इसमें गलियों में नालियों का निर्माण, हर नाली का पानी नालों में डालने के साथ ही सीईटी प्लांट, स्ट्रांग वाटर ट्रीटमेंट प्लांट आदि बनाए जाएंगे। – विशाल मिश्रा, नगर आयुक्त।