Sunday, January 11, 2026
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देहरादून में फर्जी दस्तावेज रैकेट का पर्दाफाश, बांग्लादेशी सुबेदा केस में रुड़की और पटेलनगर के सीएससी सेंटर जांच के घेरे में

देहरादून।
उत्तराखंड में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान दिलाने वाले गिरोह पर दून पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। पटेलनगर क्षेत्र से फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार की गई बांग्लादेशी नागरिक सुबेदा बेगम उर्फ प्रिया के मामले में जांच अब देहरादून और रुड़की के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तक पहुंच गई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि सुबेदा के जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे अहम दस्तावेज इन्हीं केंद्रों के माध्यम से तैयार कराए गए थे।

घुसपैठिए बिना वैध पहचान के सरकारी दस्तावेज कैसे बनवा रहे हैं, इस सवाल की तह तक जाने के लिए दून पुलिस उस संगठित सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ रही है, जो पहले भी मामून हसन और बबली बेगम जैसे बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी पहचान दिला चुका है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा है और इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है।

सीएससी संचालकों से पूछताछ, सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
पटेलनगर पुलिस ने शुक्रवार को देहरादून स्थित एक सीएससी सेंटर के संचालक फिरोज से लंबी पूछताछ की। पूछताछ में फिरोज ने बताया कि सुबेदा का आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भेजा गया था, जबकि दस्तावेजों का सत्यापन स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) द्वारा किया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उस समय किन बीएलओ की ड्यूटी थी और किस आधार पर सत्यापन किया गया।

सुबेदा ने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेज रुड़की के सीएससी संचालक अजीत कुमार और देहरादून के फिरोज के जरिए बनवाए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसा नवंबर 2024 में सामने आए मामून हसन के मामले में देखा गया था।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
बांग्लादेशी नागरिक मामून हसन, देहरादून में सचिन चौहान बनकर रह रहा था और नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में एक क्लब में बाउंसर की नौकरी कर रहा था। उसने अपनी साथी रीना चौहान की मदद से आधार और पैन कार्ड सहित कई दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कराए थे। वहीं, नवंबर में ही पटेलनगर से पकड़ी गई बबली बेगम भी दून में भूमि शर्मा के नाम से रह रही थी। उसके पास से आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी बरामद हुए थे। इन मामलों में भी दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका जांच के दायरे में है।

बीएलओ की संस्तुति पर गहराया शक
सुबेदा ने पूछताछ में कबूल किया है कि उसका वोटर कार्ड स्थानीय बीएलओ की संस्तुति पर बनाया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामून और बबली बेगम के मामलों में भी यह सवाल उठ चुका है कि बिना ठोस प्रमाण के विदेशी नागरिकों का स्थानीय स्तर पर सत्यापन कैसे हो गया। आशंका जताई जा रही है कि संबंधित विभागों के कुछ कर्मचारी इस सिंडिकेट के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और पते के सत्यापन व नाम बदलने की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं।

नामजद आरोपियों की तलाश तेज
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि सुबेदा के पास से बरामद बांग्लादेशी भाषा के पहचान पत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। उसके मोबाइल फोन से मिले डेटा और बैंक खातों के लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस की एक टीम रुड़की में सीएससी संचालक अजीत कुमार की तलाश में दबिश दे रही है।

एसएसपी ने बताया कि दोनों सीएससी सेंटरों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज दिलाए गए। उन्होंने बताया कि सुबेदा के पास से प्रिया रॉय और मोनी नाम से बने वोटर कार्ड, पैन कार्ड और आधार कार्ड बरामद हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, देहरादून में अब तक करीब 20 बांग्लादेशी नागरिक रडार पर आ चुके हैं। इनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि फर्जी दस्तावेज बनाने वाले 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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