Monday, November 2, 2026
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INSV Kaundinya: अरब सागर में ऐतिहासिक यात्रा जारी, ओमान की ओर बढ़ते हुए दो-तिहाई से अधिक सफर पूरा

अरब सागर में भारतीय नौसेना के स्वदेशी पारंपरिक पोत आईएनएसवी कौण्डिन्य (INSV Kaundinya) ने अपनी ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान ओमान की ओर बढ़ते हुए दो-तिहाई से अधिक सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस यात्रा के दौरान पोत को तेज बारिश और बदलते मौसम जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन चालक दल ने धैर्य और साहस के साथ अभियान को आगे बढ़ाया।

इस विशेष अभियान का हिस्सा अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल भी हैं। उन्होंने अरब सागर से यात्रा के 13वें दिन का अनुभव सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया। सान्याल ने बताया कि 12वें दिन के बाद पोत को कई बार तेज बारिश का सामना करना पड़ा, जिससे जहाज पर मौजूद अधिकांश सामान पूरी तरह भीग गया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय मौसम प्रणाली के कारण कुछ समय के लिए हवाएं कमजोर हो गई थीं, जिससे नौकायन में दिक्कत आई। हालांकि, बाद में पूर्व दिशा से अनुकूल हवाएं फिर से चलने लगीं और पोत अपनी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ सका। इन तमाम कठिन परिस्थितियों के बावजूद चालक दल को समुद्र के बीच एक खूबसूरत सूर्यास्त देखने को मिला, जिसने सभी का मनोबल बढ़ाया।

व्यस्त समुद्री मार्ग बनेगा अगली चुनौती

संजीव सान्याल के अनुसार, पाल उठाते समय हल्की बारिश हो रही थी, लेकिन तब तक ओमान यात्रा का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा पूरा हो चुका था। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले चरण में पोत को ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे प्राचीन काल के नाविकों को कभी जूझना नहीं पड़ा था।

उन्होंने बताया कि अब तक कभी-कभार ही कठिनाइयां सामने आई हैं, लेकिन जल्द ही आईएनएसवी कौण्डिन्य एक ऐसे व्यस्त समुद्री मार्ग में प्रवेश करेगा, जहां तेल टैंकरों और बड़े कंटेनर जहाजों की भारी आवाजाही रहती है। आधुनिक समुद्री यातायात के बीच पारंपरिक तकनीक से बने पोत का सुरक्षित संचालन एक बड़ी परीक्षा होगी।

भारतीय समुद्री विरासत का प्रतीक

गौरतलब है कि आईएनएसवी कौण्डिन्य भारतीय नौसेना का स्वदेशी पोत है, जिसे पारंपरिक टंकाई (स्टिच्ड शिप) तकनीक से तैयार किया गया है। यह पोत भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा और नौकायन कौशल का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

आईएनएसवी कौण्डिन्य ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से मस्कट (ओमान) के लिए अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू की थी। यह अभियान न केवल भारतीय नौसेना की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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