Saturday, January 17, 2026
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हरिद्वार: हरकी पैड़ी पर गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित, रील-वीडियो बनाने पर भी पूर्ण रोक

हरिद्वार।
धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा घाटों की पवित्रता और तीर्थ की मर्यादा बनाए रखने के लिए श्रीगंगा सभा ने सख्त कदम उठाया है। हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप समेत प्रमुख घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले की जानकारी देने के लिए शुक्रवार को विभिन्न स्थानों पर चेतावनी वाले बैनर और बोर्ड लगाए गए हैं।

श्रीगंगा सभा की ओर से लगाए गए बोर्डों में स्पष्ट किया गया है कि घाटों पर किसी भी प्रकार का फिल्मी गीतों पर वीडियो या सोशल मीडिया रील बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि इस तरह की सामग्री किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होती पाई गई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

श्रीगंगा सभा का कहना है कि यह निर्णय ब्रिटिश शासनकाल में लागू म्यूनिसिपल एक्ट के प्रावधानों के तहत लिया गया है। उस समय हरिद्वार को एक पवित्र धार्मिक नगरी के रूप में संरक्षित करने के लिए विशेष नियम बनाए गए थे। इन्हीं नियमों के आधार पर अब घाटों की मर्यादा को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर लगाए गए इन बैनरों को लेकर दिनभर चर्चाएं होती रहीं। स्थानीय व्यापारी और श्रद्धालु इसे सनातन धर्म और धार्मिक परंपराओं की रक्षा की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि हाल के दिनों में घाटों पर अनुचित गतिविधियां बढ़ी थीं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही थीं।

श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि तीर्थ स्थलों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहां के नियमों और मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए ऐसे कदम आवश्यक हो गए हैं।

श्रीगंगा सभा का ऐतिहासिक महत्व
श्रीगंगा सभा की स्थापना वर्ष 1916 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने तीर्थ पुरोहितों और महंतों के साथ मिलकर की थी। इसका उद्देश्य गंगा की अविरल धारा और पवित्र स्वरूप की रक्षा करना था। अंग्रेजी शासनकाल में बनाए जा रहे बांधों और अवरोधों के खिलाफ महामना के प्रयासों के चलते गंगा की धारा आज भी अविरल बनी हुई है।

इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि ब्रिटिश शासन ने हरिद्वार को हिंदू सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र मानते हुए इसे म्यूनिसिपल दर्जा दिया था और शहर की तीन किलोमीटर की सीमा में मांस और मदिरा की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध लगाया था।

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