Monday, November 2, 2026
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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का संशोधित अध्यादेश लागू, कानून को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव

देहरादून।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के साथ-साथ इसे और सशक्त बनाने के लिए संशोधित अध्यादेश भी प्रभावी कर दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा लाए गए यूसीसी संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है, जिसके बाद यह पूरे प्रदेश में लागू हो गया है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के लागू होने के 27 जनवरी को एक वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले सरकार ने यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन कर इसे और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक हितैषी बनाने की पहल की है। सरकार का कहना है कि यूसीसी नागरिकों की निजी जानकारियों की सुरक्षा के अपने संकल्प पर खरी उतरी है और संशोधन के जरिए इसे और मजबूत किया गया है।

संशोधित अध्यादेश के माध्यम से समान नागरिक संहिता के कई प्रावधानों में प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार किए गए हैं, ताकि कानून का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

यूसीसी संशोधन के प्रमुख प्रावधान

  • अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू की गई है।

  • धारा 12 के अंतर्गत ‘सचिव’ के स्थान पर अब ‘अपर सचिव’ को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है।

  • उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई न किए जाने पर संबंधित मामला स्वतः पंजीयक और पंजीयक जनरल को भेजे जाने का प्रावधान किया गया है।

  • उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील का अधिकार दिया गया है और दंड की वसूली भू-राजस्व की तरह किए जाने की व्यवस्था जोड़ी गई है।

  • विवाह के समय पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने को अब विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है।

  • विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या गैर-कानूनी कृत्यों के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं।

  • लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान जोड़ा गया है।

  • अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर अब ‘जीवनसाथी’ शब्द का उपयोग किया जाएगा।

  • विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने का अधिकार पंजीयक जनरल को दिया गया है।

राज्य सरकार का कहना है कि संशोधित समान नागरिक संहिता से कानून का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और सामाजिक व्यवस्था में पारदर्शिता व समानता को और मजबूती मिलेगी।

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