Tuesday, January 27, 2026
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राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार: उत्तराखंड के साहसी बच्चों के हौसले बुलंद, लेकिन तीन वर्षों से राष्ट्रीय सम्मान से दूर

देहरादून। उत्तराखंड में साहसी बच्चों की कमी नहीं है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां बच्चों ने जोखिम उठाकर न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जान भी बचाई है। इसके बावजूद बीते करीब तीन वर्षों से राज्य के किसी भी बच्चे का नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार की सूची में शामिल नहीं हो सका है।

हाल के दिनों में भालू और गुलदार के बढ़ते हमलों के चलते पहाड़ी जिलों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। कई क्षेत्रों में बच्चे स्कूल आते-जाते समय लाठी और दराती साथ लेकर चल रहे हैं। कई बार इन्हीं बच्चों ने साहस दिखाते हुए खुद को और आसपास के लोगों को वन्यजीवों के हमलों से बचाया है। इसके अलावा आग, पानी, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों में भी राज्य के बच्चों ने बहादुरी का परिचय दिया है।

राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव पुष्पा मानस के अनुसार, उत्तराखंड में ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिन्होंने असाधारण साहस दिखाया है। पूर्व में भारतीय बाल कल्याण परिषद की ओर से हर वर्ष आवेदन आमंत्रित किए जाते थे और चयनित बच्चों को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से न तो इसके लिए आवेदन मांगे गए और न ही राज्य की ओर से कोई प्रस्ताव भेजा गया। वर्ष 2024 और 2025 में यह प्रक्रिया पूरी तरह से ठप रही।

राज्य स्तर पर वीरता पुरस्कार का प्रस्ताव

पुष्पा मानस ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान न मिलने की स्थिति में भी इन बहादुर बच्चों को राज्य स्तर पर अवश्य सम्मानित किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्य बाल कल्याण परिषद की अगली बैठक फरवरी या मार्च में प्रस्तावित है, जिसमें वीरता पुरस्कार शुरू करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पुरस्कार की धनराशि के लिए प्रायोजक उपलब्ध हैं, जिससे योजना को लागू करने में किसी प्रकार की आर्थिक बाधा नहीं आएगी।

पहले भी मिला था आश्वासन

राज्य बाल कल्याण परिषद की पूर्व बैठकों में राजभवन की ओर से ऐसे बच्चों को सम्मानित किए जाने का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। उल्लेखनीय है कि राज्य बाल कल्याण परिषद में राज्यपाल अध्यक्ष होते हैं, ऐसे में परिषद को उम्मीद है कि आगामी बैठक में इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जाएगा।

उत्तराखंड के इन बच्चों को मिल चुका है राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

अब तक उत्तराखंड के 15 बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें टिहरी गढ़वाल के हरीश राणा (2003), हरिद्वार की माजदा (2004), अल्मोड़ा की पूजा कांडपाल (2007), देहरादून के प्रियांशु जोशी (2010), देहरादून की स्व. श्रुति लोधी (2010), रुद्रप्रयाग के स्व. कपिल नेगी (2011), चमोली की स्व. मोनिका उर्फ मनीषा (2014), देहरादून के लाभांशु (2014), टिहरी के अर्जुन (2015), देहरादून के सुमित ममगाई (2016), टिहरी गढ़वाल के पंकज सेमवाल (2017), पौड़ी गढ़वाल की राखी (2019), नैनीताल के सनी (2020), पिथौरागढ़ के मोहित चंद उप्रेती (2020) और रुद्रप्रयाग के नितिन रावत (2022) शामिल हैं।

लगातार तीन वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर किसी बच्चे को सम्मान न मिलने से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या बहादुरी की इन मिसालों को उचित मंच और पहचान मिल पा रही है। अब उम्मीद की जा रही है कि राज्य स्तर पर पहल कर इन बच्चों के साहस को सम्मानित किया जाएगा और राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका हक दिलाने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।

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