Tuesday, March 31, 2026
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देहरादून में लाइट मेट्रो पर विचार, ओएनजीसी मुख्यालय यहीं रहेगा: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी

देहरादून। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि ओएनजीसी का मुख्यालय देहरादून से कहीं भी स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके मुख्यालय को दिल्ली या किसी अन्य शहर में ले जाने की कोई योजना केंद्र सरकार के पास नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी संकेत दिए कि राजधानी देहरादून में भविष्य में यातायात दबाव बढ़ने की स्थिति में लाइट मेट्रो जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पारंपरिक मेट्रो परियोजनाएं अत्यधिक खर्चीली होती हैं और देश के एक-दो शहरों को छोड़कर अधिकांश मेट्रो रेल परियोजनाएं घाटे में चल रही हैं।

2018 में हुआ था पैन स्थानांतरण का प्रयास

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में ओएनजीसी का स्थायी खाता संख्या (पैन) देहरादून से दिल्ली स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया था। इस संबंध में ओएनजीसी ने उत्तराखंड के मुख्य आयकर आयुक्त को पत्र भी लिखा था, लेकिन कर्मचारी यूनियनों के तीव्र विरोध के चलते इस प्रक्रिया को रोक दिया गया।
ओएनजीसी अपने कर्मचारियों की ओर से हर वर्ष लगभग 8,500 करोड़ रुपये से अधिक का आयकर जमा करती है, जो उत्तराखंड से जमा होने वाले आयकर का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसी कारण ओएनजीसी को राज्य की अर्थव्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संस्थान माना जाता है।

मेट्रो परियोजना पर क्या बोले मंत्री

देहरादून में मेट्रो या नियो मेट्रो प्रस्ताव मंत्रालय में लंबित होने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि जब वे जुलाई 1974 में एलबीएस एकेडमी मसूरी में प्रशिक्षण लेने आए थे, तब की तुलना में आज सड़कों पर यातायात का दबाव कहीं अधिक है। आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में मेट्रो जैसी भारी-भरकम परियोजना व्यावहारिक नहीं लगती।
उन्होंने कहा, “भविष्य में जनसंख्या और यातायात के आंकड़ों को देखते हुए लाइट मेट्रो जैसे कम खर्चीले विकल्पों पर जरूर विचार किया जा सकता है।”

पहाड़ी क्षेत्रों में पीएनजी-सीएनजी पहुंचाना मुश्किल

एक अन्य सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएनजी और सीएनजी को पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाना भौगोलिक कारणों से बेहद कठिन है। साथ ही उन्होंने देश को तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए चल रहे प्रयासों का जिक्र किया।
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर अब देश के हित में हर वर्ष 150 नए तेल कुएं खोदने का लक्ष्य रखा गया है और भारत अपने घरेलू तेल संसाधनों की खोज में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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