Saturday, October 10, 2026
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शोध में खुलासा: शहरीकरण से बढ़ रही देहरादून की गर्मी, कंक्रीट का जंगल ठंडक पर पड़ रहा भारी

देहरादून।
राजधानी देहरादून में तेजी से फैलता शहरीकरण अब शहर की आबोहवा पर सीधा असर डालने लगा है। बढ़ती इमारतें, चौड़ी सड़कें और कंक्रीट से ढके क्षेत्र शहर की प्राकृतिक ठंडक को कम कर रहे हैं और तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। यह तथ्य दून विश्वविद्यालय और नेशनल एटमॉस्फेरिक रिसर्च लैबोरेटरी (एनएआरएल) द्वारा किए गए एक संयुक्त शोध में सामने आया है।

देहरादून और मसूरी का तुलनात्मक अध्ययन

शोध के दौरान विशेषज्ञों ने देहरादून और मसूरी के तापमान में शहरीकरण से होने वाले बदलावों का तुलनात्मक अध्ययन किया। अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि देहरादून में तापमान बढ़ने का संबंध सीधे शहरीकरण से है, जबकि मसूरी में शहरीकरण बढ़ने के बावजूद फिलहाल तापमान में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।

प्री-मानसून अवधि में किया गया विश्लेषण

दून विश्वविद्यालय ने यह अध्ययन गर्मी के मौसम, यानी मानसून से पहले की अवधि (अप्रैल, मई और जून 2021) में किया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि शहरी संरचनाएं—जैसे इमारतें, सड़कें और कंक्रीट क्षेत्र—सतह और वायुमंडलीय तापमान को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।

दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग के डॉ. उज्ज्वल के अनुसार, इस शोध में डब्ल्यूआरएफ (WRF) मॉडल का उपयोग किया गया। इसमें देहरादून (करीब 640 मीटर ऊंचाई) और मसूरी (करीब 2005 मीटर ऊंचाई) को आधार बनाकर शहरीकरण के कारण तापमान में पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया गया।

शहरी संरचनाओं से बढ़ी रात की गर्माहट

अध्ययन में दो स्थितियों का विश्लेषण किया गया—पहली, जब क्षेत्र में खेती, जंगल, प्राकृतिक वायु प्रवाह और सौर विकिरण जैसी स्थितियां हों, और दूसरी, जब उन्हीं क्षेत्रों में शहरी ढांचा विकसित हो।

मॉडल के परिणाम बताते हैं कि देहरादून में शहरी संरचनाओं के कारण तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। खासकर रात के समय शहर के मुख्य शहरी क्षेत्रों में तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक पाया गया। शोध के अनुसार, शहरी इलाकों में गर्म हवा देर तक बनी रहती है, जिससे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव उत्पन्न होता है।

मसूरी में फिलहाल नहीं दिखा असर

वहीं, जब इसी मॉडल के आधार पर मसूरी में शहरीकरण के प्रभावों का अध्ययन किया गया, तो वहां फिलहाल तापमान में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि तापमान आकलन में शहरीकरण के प्रभावों को शामिल नहीं किया जाए, तो बदलाव स्पष्ट नहीं होता, लेकिन जैसे ही इन प्रभावों को जोड़ा जाता है, देहरादून जैसे शहरों में अंतर साफ नजर आता है।

अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध

इस अध्ययन से संबंधित शोध पत्र ‘मेट्रोलॉजी, हाइड्रोलॉजी एंड वॉटर मैनेजमेंट’ विषयक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें एनएआरएल के विशेषज्ञ विकास सिंह भी शोध दल का हिस्सा रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरी विकास के साथ हरित क्षेत्रों और पर्यावरण संतुलन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में देहरादून का तापमान और अधिक बढ़ सकता है, जिससे जनजीवन और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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