देहरादून। देश के नए आपराधिक कानूनों को धरातल पर उतारने में उत्तराखंड ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं और तकनीकी सुधारों को तेजी से लागू करते हुए उत्तराखंड पूरे देश में प्रथम स्थान पर काबिज हो गया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी जनवरी 2026 के नवीनतम डैशबोर्ड आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड ने 93.46 अंकों के साथ यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
राष्ट्रीय रैंकिंग में राज्यों का प्रदर्शन
इस सूची में उत्तराखंड ने कड़े मुकाबले के बीच अन्य राज्यों को पीछे छोड़ा है:
| रैंक | राज्य | प्राप्त अंक |
| 1 | उत्तराखंड | 93.46 |
| 2 | हरियाणा | 93.41 |
| 3 | असम | 93.16 |
| 4 | सिक्किम | 91.82 |
| 5 | मध्य प्रदेश | 90.55 |
सफलता के पीछे का तकनीकी आधार: ICJS 2.0
उत्तराखंड की इस सफलता का मुख्य स्तंभ इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन है। राज्य ने ‘वन डेटा, वन एंट्री’ की नीति अपनाई है, जिससे पुलिस, कोर्ट, जेल, अभियोजन और फॉरेंसिक विभागों के बीच डेटा का सीधा आदान-प्रदान संभव हुआ है।
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ई-साक्ष्य ऐप: अपराध स्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए इस ऐप का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
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पेपरलेस वर्क: डिजिटलीकरण के कारण कागजी काम में कमी आई है और मुकदमों के निस्तारण में गति मिली है।
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स्मार्ट पुलिसिंग: राज्य के 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
रीयल-टाइम डेटा एंट्री पर जोर
पुलिस महानिरीक्षक सुनील कुमार मीणा ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार लगातार समीक्षा बैठकें की गईं। राज्य ने न केवल तकनीकी ढांचा तैयार किया, बल्कि रीयल-टाइम डेटा एंट्री और फॉरेंसिक मोबाइल वैन जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देकर जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है। वर्चुअल सुनवाई के लिए ‘न्याय श्रुति’ माध्यम का उपयोग भी मील का पत्थर साबित हुआ है।
निष्कर्ष: उत्तराखंड का नंबर-1 बनना यह दर्शाता है कि राज्य अपनी कानून व्यवस्था को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।