Tuesday, November 3, 2026
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उत्तराखंड में श्रमिकों को बड़ा तोहफा: एक साल में मिलेगी ग्रेच्युटी, पीएफ-बीमा और मुफ्त हेल्थ चेकअप की सुविधा

देहरादून। श्रमिक दिवस के मौके पर उत्तराखंड के लाखों श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में लागू की जा रही नई श्रम संहिताओं के तहत अब श्रमिकों को कई अहम सुविधाएं मिलेंगी। इनमें सबसे बड़ी सौगात यह है कि अब ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि अनुबंध पर कार्यरत श्रमिकों को सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ही इसका लाभ मिल सकेगा।

दरअसल, केंद्र सरकार की चार प्रमुख श्रम संहिताएं—मजदूरी संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता—को उत्तराखंड सरकार ने पिछले वर्ष ही अपना लिया था। अब इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए श्रम विभाग नियमावली तैयार करने में जुटा है।

श्रम विभाग ने “उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026” का ड्राफ्ट 18 मार्च 2026 को जारी किया था। इस पर 17 अप्रैल तक प्रदेशभर से सुझाव और आपत्तियां प्राप्त करने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही इसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

वहीं, “उत्तराखंड औद्योगिक संबंध संहिता नियमावली 2026” का ड्राफ्ट भी बृहस्पतिवार को जारी कर दिया गया है। इस पर 30 मई तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक व्यक्ति सचिव, श्रम विभाग, उत्तराखंड सचिवालय देहरादून या ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं। शेष दो संहिताओं—सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा—की नियमावली भी जल्द सार्वजनिक की जाएगी।

श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि राज्य सरकार ने चारों श्रम संहिताओं को अपनाया है और अब उनकी नियमावली लागू करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।

श्रमिकों को मिलेंगे ये बड़े लाभ
नई नियमावली लागू होने के बाद राज्य के सभी श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी। वेतन का भुगतान समय पर और डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।

अनुबंध पर कार्य करने वाले श्रमिकों को अब एक वर्ष की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और गिग वर्कर्स—जैसे डिलीवरी और राइडिंग पार्टनर—को पहली बार भविष्य निधि (पीएफ) और बीमा योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

महिला श्रमिकों को भी नई सुविधा दी गई है। वे अपनी सहमति से रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी, बशर्ते नियोक्ता उनकी सुरक्षा और घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाए।

नई श्रम संहिताओं के अनुसार, किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य होगा। इससे पीएफ और ग्रेच्युटी फंड में स्वतः बढ़ोतरी होगी।

इसके अलावा, 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी हो सकेगी।

इन नई व्यवस्थाओं से राज्य के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और बेहतर कार्य परिस्थितियों का लाभ मिलने की उम्मीद है।

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