Wednesday, March 11, 2026
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उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर: राज्य गठन के बाद 1296 लोगों की मौत, 6624 घायल

विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। राज्य गठन के बाद से अब तक वन्य जीवों के हमलों में 1296 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6624 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह जानकारी राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा में दी।

वन मंत्री ने यह आंकड़े भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला के प्रश्न के उत्तर में सदन में प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है, लेकिन वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फिलहाल कोई प्रावधान नहीं है।

संघर्ष कम करने के लिए उठाए जा रहे कदम

वन मंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाई जा रही है। इसके तहत:

  • प्रभावित क्षेत्रों में वन कर्मचारियों की नियमित गश्त कराई जा रही है।

  • वन्यजीवों की त्वरित निगरानी और नियंत्रण के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित की गई है।

  • आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए पिंजरे लगाने और ट्रेंक्यूलाइज (बेहोश) करने की व्यवस्था की गई है।

  • जंगलों से सटे गांवों में बायो-फेंसिंग तकनीक और हैबिटेट मैनेजमेंट के जरिए वन्यजीवों को आबादी से दूर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भालू द्वारा घरों को नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

सदन में कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने पिथौरागढ़ जिले के दारमा सहित अन्य क्षेत्रों में भालू द्वारा घरों को नुकसान पहुंचाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई गांवों में भालू घरों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

इस पर वन मंत्री ने बताया कि पहले भालू द्वारा घरों को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजा देने का प्रावधान नहीं था, लेकिन अब सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की व्यवस्था लागू कर दी है।

उन्होंने यह भी बताया कि वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को पहले चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर छह लाख रुपये और अब 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

वनाग्नि की घटनाएं भी चिंता का विषय

वन मंत्री ने प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं को भी बड़ी चुनौती बताया। भाजपा विधायक सुरेश गढ़िया के प्रश्न पर उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में प्रदेश में वनाग्नि की 1276 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनसे 1771.66 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ।

इन घटनाओं में 13 लोगों की मौत भी हुई। उन्होंने कहा कि सरकार वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। साथ ही आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए फायर वॉचर तैनात किए गए हैं और गांव स्तर पर ग्राम पंचायत समितियों का गठन भी किया गया है, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।

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