Thursday, March 19, 2026
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उत्तराखंड में पहली बार होंगी प्रवासी पंचायतें, 24 अप्रैल को टिहरी से होगा आगाज़

देहरादून: उत्तराखंड में पलायन की समस्या को कम करने और प्रवासियों को अपने पैतृक गांवों से जोड़ने के लिए राज्य में पहली बार प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से की जाएगी। इन पंचायतों के माध्यम से उन प्रवासियों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा, जो अपने पैतृक गांव लौटकर बसने की इच्छा रखते हैं।

राज्य के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों में रह रहे प्रवासियों को अपने गांवों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग ने प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार की है। योजना के तहत पहली बार प्रदेश के प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाएगा।

आयोग के सर्वेक्षण के अनुसार अब तक 6282 प्रवासी अपने गांवों में वापस लौट चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के हर जिले में प्रवासी पंचायतों के आयोजन के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी की अध्यक्षता में पौड़ी में आयोजित बैठक में प्रवासी पंचायतों की विस्तृत रूपरेखा तय की गई।

इन पंचायतों में राज्य के अन्य जिलों या बाहरी राज्यों में रह रहे उन प्रवासियों को आमंत्रित किया जाएगा, जो अपने पैतृक गांव लौटकर स्वरोजगार या अन्य गतिविधियों के माध्यम से आजीविका शुरू करना चाहते हैं।

स्वरोजगार के अनुभव साझा करेंगे प्रवासी

कोविड-19 काल में अपने गांव लौटे कई प्रवासियों ने स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के सफल मॉडल स्थापित किए हैं। कई लोग कृषि, बागवानी, मसाला खेती, सगंध फसलें, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ प्रवासियों ने होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट, पशुपालन और डेयरी व्यवसाय के माध्यम से भी अच्छी आय के स्रोत विकसित किए हैं।

प्रवासी पंचायतों के दौरान ऐसे सफल प्रवासी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे अन्य लोगों को भी गांवों में स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरणा मिल सके।

नवंबर तक सभी जिलों में होंगे आयोजन

पलायन निवारण आयोग के अनुसार प्रवासी पंचायतों का आयोजन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में इन्हें आयोजित कर लिया जाएगा। इन कार्यक्रमों में जिला स्तर के विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और प्रवासियों को सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी ने बताया कि प्रवासी पंचायतों के माध्यम से प्रवासियों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित किया जाएगा, ताकि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें और पलायन की समस्या को प्रभावी तरीके से कम किया जा सके।

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