Friday, March 20, 2026
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नवरात्र के शुभ मुहूर्त में धामी कैबिनेट का विस्तार, खजान दास, मदन कौशिक समेत पांच नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ

देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार का मंत्रिमंडल शुक्रवार को आखिरकार विस्तारित हो गया। लंबे समय से चल रही कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सरकार में पांच नए मंत्रियों को शामिल किया गया। नवरात्र के दूसरे दिन लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शपथ लेने वालों में राजपुर से विधायक खजान दास, भरत सिंह चौधरी, वरिष्ठ भाजपा नेता मदन कौशिक, विधायक प्रदीप बत्रा और भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा शामिल हैं। समारोह की शुरुआत सबसे पहले खजान दास के शपथ ग्रहण से हुई। इसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ ली। फिर मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की।

लंबे समय से हो रही थी कैबिनेट विस्तार की चर्चा

प्रदेश में धामी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर काफी समय से अटकलें लगाई जा रही थीं। मंत्रिमंडल में पांच पद रिक्त थे, जिन्हें अब भर दिया गया है। बताया जा रहा है कि नए मंत्रियों के चयन में विधायकों के पिछले चार वर्षों के कामकाज, संगठन में सक्रिय भूमिका और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को आधार बनाया गया।

सरकार और संगठन के बीच कैबिनेट विस्तार को लेकर कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी और शपथ ग्रहण के लिए नवरात्र का शुभ मुहूर्त चुना गया।

क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का रखा गया ध्यान

धामी सरकार ने इस कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने का प्रयास किया है। मैदान और पहाड़ी क्षेत्रों दोनों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष जोर दिया गया है।

इस विस्तार के बाद पहली बार हरिद्वार जिले को दो कैबिनेट मंत्री मिले हैं। वर्तमान में मंत्रिमंडल में गढ़वाल मंडल से आठ और कुमाऊं मंडल से चार मंत्री शामिल हैं।

नए चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं को भी मौका

कैबिनेट विस्तार में तीन विधायकों को पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला है, जबकि दो अनुभवी नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इससे सरकार को अनुभव और नई ऊर्जा दोनों का संतुलन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार आगामी राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया गया एक अहम कदम है।

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