Saturday, March 21, 2026
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उत्तराखंड: चार साल बाद हुआ धामी मंत्रिमंडल का विस्तार, मिशन 2027 के लिए भाजपा ने साफ किया नेतृत्व

उत्तराखंड: चार साल के लंबे इंतजार के बाद मंत्रिमंडल विस्तार, 2027 की रणनीति साफ

उत्तराखंड में लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच आखिरकार मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। चार साल के इंतजार के बाद दूसरे नवरात्र के शुभ मुहूर्त पर पांच नए मंत्रियों ने शपथ ली। इसके साथ ही धामी सरकार के मंत्रिमंडल के सभी पद भर गए और प्रदेश की राजनीति में चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा की आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति भी काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। पार्टी ने संकेत दे दिए हैं कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भी मुख्यमंत्री धामी ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे और उन्हीं के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा।

इतिहास में पहली बार लगातार दो चुनावों का नेतृत्व

राज्य के राजनीतिक इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब कोई मुख्यमंत्री लगातार दो विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करेगा। मुख्यमंत्री धामी न केवल अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं, बल्कि वह दूसरी बार भी पार्टी के मुख्य चेहरे के रूप में चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

2022 में टूटा था सत्ता परिवर्तन का मिथक

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर उत्तराखंड की राजनीति में वर्षों से चले आ रहे सत्ता परिवर्तन के मिथक को तोड़ दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री धामी ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया राजनीतिक रिकॉर्ड भी बनाया था।

हालांकि इसके बावजूद धामी सरकार में पिछले चार वर्षों से मंत्रियों के पांच पद खाली चल रहे थे। इससे प्रदेश की राजनीति में लगातार कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं होती रहीं और राजनीतिक उहापोह की स्थिति बनी रही।

चुनाव से पहले पूरी टीम के साथ मैदान में भाजपा

अब विधानसभा चुनावों की संभावित घोषणा से करीब दस महीने पहले मंत्रिमंडल का विस्तार कर भाजपा ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने सभी पदों को भरकर चुनावी तैयारियों को गति देने का संदेश दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा ने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास किया है, ताकि मिशन 2027 की राह को मजबूत किया जा सके।

इस तरह धामी मंत्रिमंडल का यह विस्तार केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया एक अहम राजनीतिक निर्णय माना जा रहा है।

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