Thursday, March 26, 2026
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पीएम सूर्यघर योजना: उत्तराखंड के 5500 से अधिक लाभार्थियों को मिलेगी राज्य सब्सिडी, कैबिनेट के फैसले से खत्म होगा इंतजार

देहरादून। उत्तराखंड में पीएम सूर्यघर योजना के तहत राज्य सब्सिडी का इंतजार कर रहे 5500 से अधिक लाभार्थियों को जल्द राहत मिलने वाली है। राज्य मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उन सभी लाभार्थियों को राज्य सब्सिडी का लाभ देने का फैसला किया है, जिनके सौर ऊर्जा संयंत्र 31 मार्च 2025 तक स्थापित होकर चालू हो चुके थे। इस निर्णय से लंबे समय से सब्सिडी का इंतजार कर रहे हजारों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

राज्य सरकार के इस फैसले के तहत उन सभी सोलर प्रोजेक्ट्स को राज्य सब्सिडी दी जाएगी, जो निर्धारित समय सीमा तक संचालित हो गए थे। इससे राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

केंद्र और राज्य सरकार दोनों दे रही हैं सब्सिडी

पीएम सूर्यघर योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से तीन किलोवाट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट पर 85,800 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा राज्य सरकार पहले प्रति किलोवाट 17,000 रुपये की दर से अधिकतम तीन किलोवाट तक कुल 51,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान कर रही थी।

हालांकि पिछले वर्ष एक अप्रैल से राज्य सरकार ने अपनी सब्सिडी योजना बंद कर दी थी, जिसके कारण पहले से सौर संयंत्र स्थापित कर चुके कई लाभार्थियों को राज्य सब्सिडी मिलने में देरी हो रही थी। अब कैबिनेट के ताजा फैसले के बाद उन सभी पात्र लाभार्थियों को सब्सिडी देने का रास्ता साफ हो गया है।

उरेडा के माध्यम से जारी हो रही सब्सिडी

राज्य में सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया उरेडा (उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) के माध्यम से की जा रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार बजट उपलब्ध होने के बाद उरेडा ने उन सभी लाभार्थियों को राज्य सब्सिडी जारी कर दी है, जिनके सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट जनवरी 2024 तक शुरू हो चुके थे।

अब कैबिनेट के निर्णय के आधार पर बजट मिलने के बाद शेष लाभार्थियों को भी सब्सिडी जारी की जाएगी। फिलहाल लगभग 3000 लाभार्थियों की सब्सिडी आवंटन प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को और बढ़ावा मिलेगा तथा लोग अपने घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे। इससे बिजली की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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