Saturday, October 24, 2026
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उत्तराखंड कांग्रेस में जारी कलह, ‘हरदा’ की फल पार्टी में नहीं पहुंचे कई दिग्गज नेता

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में आंतरिक खटास कम होने के बजाय और गहराती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) द्वारा आयोजित फल पार्टी भी पार्टी के नेताओं के बीच चल रही दूरी को कम नहीं कर सकी। इस आयोजन में जहां बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे, वहीं कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम से नदारद रहे।

देहरादून स्थित आवास पर आयोजित इस फल पार्टी में मौसमी फलों जैसे तरबूज, खरबूज और ककड़ी के साथ पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का भी आयोजन किया गया था। हरदा ने सभी नेताओं को खुला निमंत्रण दिया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के कई प्रमुख चेहरे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा

कार्यक्रम में गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत जैसे वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हुए। बताया गया कि ये सभी नेता टिहरी में आयोजित पार्टी की रैली में व्यस्त थे।

हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस गैरमौजूदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जिससे कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की स्थिति एक बार फिर सामने आई है।

अवकाश के बाद भी सक्रिय नहीं हुए हरदा

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हाल ही में अपने 15 दिन के अवकाश को लेकर चर्चा में रहे। उनका अवकाश 10 अप्रैल को समाप्त हो चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।

फल पार्टी के आयोजन के बाद भी उनके अगले कदम को लेकर असमंजस बना हुआ है। इस पर हरीश रावत ने कहा कि वे अपने अवकाश के प्रभाव पर मंथन कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

“अपनों को निमंत्रण नहीं दिया जाता”

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि अपने लोगों को औपचारिक निमंत्रण देने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिहरी में पार्टी की रैली होने के कारण वे वहां मौजूद थे और यदि रैली नहीं होती तो वे भी इस कार्यक्रम में शामिल होते।

स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल

हरीश रावत ने इस आयोजन को गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय नदियों के किनारे की भूमि खेती के लिए कश्यप समाज को दी गई थी, जहां अब तरबूज, खरबूज और ककड़ी की खेती की जा रही है।

कार्यक्रम में बुरांश और नींबू का जूस, जौनसार की टमाटर चटनी, भट्ट की चुटकानी, लाल भात और हरिद्वार का गुड़ भी परोसा गया।

सियासी संकेत भी साफ

हालांकि इसे गैर-राजनीतिक कार्यक्रम बताया गया, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने इस आयोजन को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर जारी मतभेदों को उजागर करता है, जो भविष्य में पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।


कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड कांग्रेस में एकजुटता अभी भी दूर की बात है और आंतरिक कलह पार्टी के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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