Tuesday, November 3, 2026
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उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: 18 प्रस्तावों पर मुहर, मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की गुरुवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कुल 18 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से अधिकांश को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों में परिवहन, शिक्षा, वन, शहरी विकास और कुंभ मेला व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं। बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट ब्रीफिंग में इन फैसलों की जानकारी दी।

कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नियमावली के तहत अब प्रवर्तन अधिकारी वर्दी में नजर आएंगे। वहीं, कुंभ मेला से जुड़े कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत मेला अधिकारी को एक करोड़ रुपये तक, मंडलायुक्त को पांच करोड़ रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया गया है, जबकि इससे अधिक लागत वाले कार्यों को शासन स्तर से मंजूरी दी जाएगी।


परिवहन और वित्त से जुड़े फैसले

कैबिनेट ने परिवहन विभाग के तहत बसों की खरीद को भी मंजूरी दी है। पहले 100 बसें खरीदने की अनुमति थी, लेकिन जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के बाद अब 109 बसें खरीदी जाएंगी।
इसके अलावा आबकारी नीति में व्यय दर 6 प्रतिशत निर्धारित किए जाने के अनुरूप वाणिज्य कर विभाग की नियमावली में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई।


वन और पर्यावरण क्षेत्र में बदलाव

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई है, जबकि वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है।
साथ ही, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

वन सीमा क्षेत्रों में आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी और मानव-हाथी संघर्ष में भी कमी आएगी। इसके तहत “वन सीमा मौन पालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष नियमावली 2026” को भी स्वीकृति प्रदान की गई।


शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय

राज्य में मदरसों की मान्यता को लेकर भी अहम फैसले लिए गए हैं।

  • कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को अब जिला स्तर से मान्यता दी जाएगी।
  • कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इसके लिए जल्द अध्यादेश लाया जाएगा।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी दी गई है। सहायक अध्यापकों की सेवा नियमावली को भी स्वीकृति मिल गई है।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का विस्तार करते हुए अब इसका लाभ 21 अशासकीय कॉलेजों तक बढ़ा दिया गया है।


अन्य प्रमुख फैसले

  • प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) अब केवल एक वर्ष तक ही वैध रहेगी।
  • लोक निर्माण विभाग में जेई भर्ती से जुड़े मामलों की जानकारी कैबिनेट के समक्ष रखी गई।
  • वर्कचार्ज कर्मियों से संबंधित निर्णय पर हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी दी गई।
  • डी श्रेणी के ठेकेदारों को अब 1 करोड़ की बजाय 1.5 करोड़ रुपये तक के कार्य दिए जा सकेंगे।
  • उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है।

निष्कर्ष:
कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और रोजगार सृजन की दिशा में अहम माना जा रहा है। खासतौर पर मधुमक्खी पालन नीति और परिवहन व शिक्षा क्षेत्र में लिए गए निर्णयों का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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