देहरादून। उत्तराखंड के 108 नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों की कार्यप्रणाली, वित्तीय स्थिति और व्यवस्थाओं में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश के शहरी विकास विभाग ने नगर निकायों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत अध्ययन कराने के लिए National Institute of Urban Affairs (एनआईयूए) को जिम्मेदारी सौंपी है। यह संस्थान निकायों की आय, व्यय, मानव संसाधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था समेत सभी पहलुओं का अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगा।
प्रदेश के अधिकांश नगर निकाय वर्तमान में वित्तीय संकट और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ बड़े नगर निगमों को छोड़ दें तो अधिकतर निकाय केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भर हैं। बीते वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि नगर निकायों की स्वयं की आय कुल खर्च के मुकाबले काफी कम है, जिसके चलते विकास कार्यों और बुनियादी सेवाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करना चुनौती बना हुआ है।
नगर निकायों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आय बढ़ाने की
शहरी विकास विभाग के अनुसार, निकायों की सबसे बड़ी समस्या राजस्व बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर निकायों ने स्वयं लगभग 280 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जबकि सरकार से उन्हें 1075.77 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई। इससे स्पष्ट है कि निकाय अब भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पाए हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति कर, व्यापारिक शुल्क, पार्किंग, विज्ञापन और अन्य स्थानीय स्रोतों से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी। एनआईयूए की रिपोर्ट इसी दिशा में मार्गदर्शन करेगी।
मानव संसाधन की भारी कमी से जूझ रहे निकाय
नगर निकायों में वर्षों से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण मानव संसाधन का संकट भी लगातार गहराता जा रहा है। विशेष रूप से सफाई कर्मचारियों की कमी के चलते कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई निकाय अस्थायी कर्मचारियों और ठेका व्यवस्था के सहारे काम चला रहे हैं।
इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कूड़ा निस्तारण, सीवरेज और शहरी सुविधाओं के रखरखाव में भी कई निकाय अपेक्षित स्तर पर काम नहीं कर पा रहे हैं। अध्ययन के दौरान इन व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
सभी निकायों का होगा व्यापक अध्ययन
एनआईयूए प्रदेश के सभी 108 नगर निकायों का विस्तृत सर्वे और अध्ययन करेगा। इसमें वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक ढांचा, मानव संसाधन, तकनीकी संसाधन और नागरिक सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाएगा। अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर शासन आगे की योजनाएं तैयार करेगा और निकायों में सुधारात्मक कदम लागू किए जाएंगे।
नगर निकायों की आय और सरकारी सहायता (करोड़ रुपये में)
| वर्ष | स्वयं की आय | सरकार से प्राप्त सहायता |
|---|---|---|
| 2020-21 | 136 | 1317.85 |
| 2021-22 | 131.65 | 1115.93 |
| 2022-23 | 167.17 | 1126.01 |
| 2023-24 | 258 | 1410.92 |
| 2024-25 | 280 | 1075.77 |
क्या है एनआईयूए
National Institute of Urban Affairs भारत सरकार से संबद्ध देश का प्रमुख शहरी थिंक टैंक है, जो वर्ष 1976 से शहरी विकास और प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। यह संस्थान शहरी प्रशासन, नीति निर्माण, शोध और नवाचार के माध्यम से शहरों के सतत विकास पर काम करता है। एनआईयूए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर भारतीय शहरों के लिए आधुनिक और व्यावहारिक समाधान विकसित करता है।
सचिव शहरी विकास ने क्या कहा
शहरी विकास सचिव Nitesh Kumar Jha ने कहा कि नगर निकायों में वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह अध्ययन शुरू कराया गया है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसी के आधार पर आगे की योजनाएं तैयार की जाएंगी और निकाय स्तर पर उन्हें लागू किया जाएगा।