देहरादून। पुरानी जेल परिसर में नेहरू वार्ड और आजादी के आंदोलन से जुड़ी अन्य स्मृतियों की बदहाली पर चिंता जताई गई। इस दौरान जेल से जुड़े जवाहर लाल नेहरू के संस्मरण सुनाए गए। भारत ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उत्सव को ‘वैज्ञानिक चेतना संपन्न आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत देश की एतिहासिक इमारतों और विरासतों को महत्व को समझने के साथ उनके संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को देहरादून की पुरानी जेल के ऐतिहासिक स्थल ‘नेहरू कक्ष में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समिति के अध्यक्ष विजय भट्ट ने बताया कि पुरानी जेल परिसर में नेहरू वार्ड एतिहासिक स्थल है। इस जेल में जवाहर लाल नेहरू के अलावा एमएल राय, गोविंद बल्लभ पंत भी रहे। स्थिति यह है कि नेहरू वार्ड खंडहर स्थिति में है। झाड़-झंक्कड़ उग आए हैं। धरोहर को सुरक्षित नहीं है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी के समय इस जगह को ठीक कराया गया, लेकिन इसके बाद सरकारों ने इसकी सुध नहीं ली।
उन्होंने बताया कि 14 नवंबर को बाल दिवस पर जेल परिसर में बच्चों के साथ कार्यक्रम किया जाएगा। वरिष्ठ पत्रकार राजू गुसाईं ने बताया कि नेहरू आजादी के आंदोलन के दौरान चार बार देहरादून जेल में रहे। एक बार उन्हें बरेली जेल में रखा गया था, लेकिन गर्मी के कारण उनके कारण थी। नाक से खून निकलने लगा। तब उन्हें देहरादून शिफ्ट किया गया। देहरादून उनकी प्रिय जगह थी। वह जेल से बेटी इंदिरा गांधी को पत्र लिखा करते थे। वह अपने एक पत्र में लिखते हैं कि जेल से बर्फ से ढका हिमालय दिखता है। बाद में अंग्रेजों ने बड़ी दीवार देकर उस हिस्से को ढक दिया, जहां से बर्फ से ढके पहाड़ दिखते थे। राजू गुसाईं ने रिसर्च, नक्शा और आर्टिकल भी दिखाए। इस दौरान सचिव कमलेश खंतवाल, वीजू नेगी, शशि भूषण जोशी, हरिओम पाली, मोहन चौहान, इंद्रेश नौटियाल, सुनीता, सुप्रिया बहुखंडी, नितेश खंतवाल, हिमांश चौहान, ओमी उनियाल आदि मौजूद रहे।