आईटीबीपी परिसर में पर्वतारोहियों के शव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। कोई ताबूत से लिपट कर तो कोई अपने साथ आए परिजन के कंधे में सिर रख कर रोया। भाई की मौत पर भावुक एक युवक को ताबूत से अलग करते समय वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गई। शव देखते ही आईटीबीपी के अस्पताल परिसर में परिजनों में कोहराम मच गया। रविवार को आईटीबीपी के मातली हेलीपैड पर वायु सेना के हेलीकाप्टर से 10 पर्वतारोहियों के शव पहुंचाए गए। शवों को पीएम के लिए आईटीबीपी के अस्पताल ले जाया गया। परिजन पहले से ही मौजूद थे। शिनाख्त के लिए परिजनों को शव दिखाए गए। अपनों के शवों को देख बदहवास परिजन फफक पड़े। कोई ताबूत से लिपट का रोने लगा तो कोई अपने साथ आए परिजन से चिपट कर रोने लगा। हादसे में मृत पैरा मिलिट्री के लांस नायक शुभम सिंह का भाई ताबूत से लिपट कर रोने लगा। उसे ताबूत से अलग करते समय वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों व अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गई। कोई अपने इकलौते बेटे की मौत पर बदहवास था तो कोई अपने छोटे भाई की मौत पर। अस्पताल परिसर में मौजूद हर किसी की आंखें नम थी। विधायक सुरेश चौहान, डीएम अभिषेक रूहेला, एसपी अर्पण यदुवंशी परिजनों को ढांढस बंधाते रहे।
बेस कैंप पर हुई इंटरनेट सुविधा उपलब्ध
उत्तरकाशी। रेस्क्यू अभियान के दौरान सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए बेस कैंप में इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो गई है। इसके लिए यहां सेना ने वी-सेट लगाया है। डोकरानी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन हादसे के रेस्क्यू अभियान में एक बड़ी समस्या सूचनाओं का आदान प्रदान भी रही है। यहां संचार के साधन न होने से दिक्कत रही है। बेस कैंप से एडवांस बेस कैंप के बीच लगभग ढाई किमी की दूरी है। एडवांस कैंप से करीब डेढ़ किमी आगे घटना स्थल है। घटना स्थल पर बरामद शवों को एडवांस बेस कैंप से कुछ आगे बनाए गए रेस्क्यू समिट में मैनुअल लाया जा रहा है। बेस कैंप से वायु सेना के एडवांस लाइट हेलीकाप्टर से शवों को मातली हेलीपैड लाया जा रहा है।