Monday, November 2, 2026
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Uttarakhand: किश्तवाड़ मुठभेड़ में कपकोट के पैरा कमांडो गजेंद्र सिंह गढ़िया शहीद, आज पहुंचेगा पार्थिव शरीर

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान उत्तराखंड के कपकोट क्षेत्र के वीर सपूत हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया देश के लिए बलिदान हो गए। वह भारतीय सेना की 2-पैरा कमांडो यूनिट में तैनात थे और संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन त्राशी’ का हिस्सा थे। उनके बलिदान की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, रविवार को किश्तवाड़ के छात्रू क्षेत्र स्थित सिंहपोरा इलाके में सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान घात लगाए आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस हमले में हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरता के साथ मुकाबला करते हुए शहीद हो गए।

आज कपकोट पहुंचेगा पार्थिव शरीर

शहीद जवान का पार्थिव शरीर मंगलवार को हेलीकॉप्टर के माध्यम से केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा। इसके बाद सरयू-खीरगंगा नदी के संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

43 वर्षीय शहीद गजेंद्र सिंह अपने पीछे पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला गढ़िया और दो पुत्र राहुल व धीरज को छोड़ गए हैं। उनका छोटा भाई किशोर गढ़िया है। शहीद के दोनों बच्चे देहरादून में पढ़ाई कर रहे हैं।

खबर मिलते ही गांव पहुंचीं पत्नी

बलिदान की सूचना मिलने के बाद पत्नी लीला गढ़िया की तबीयत बिगड़ गई थी। परिचितों की मदद से उन्हें गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड तक लाया गया, जहां से वह हेलीकॉप्टर के जरिए गांव पहुंचीं। हेलीपैड से वाहन तक उन्हें व्हीलचेयर की सहायता से ले जाया गया। सेना के निर्देश पर सूबेदार मोहन चंद्र भी कपकोट पहुंचे हैं। शहीद के आवास पर शोक व्यक्त करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी है।

2004 में हुए थे सेना में भर्ती

गजेंद्र सिंह गढ़िया ने प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय से प्राप्त की थी। कक्षा छह से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज, कपकोट से की। स्नातक प्रथम वर्ष के दौरान वर्ष 2004 में वह भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और तब से लगातार देश सेवा में जुटे रहे।

शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया का सर्वोच्च बलिदान पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। देश उनकी वीरता और सेवा को सदैव स्मरण रखेगा।

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