Sunday, January 11, 2026
Homeउत्तराखंडमकर संक्रांति 2026: एकादशी के संयोग से नहीं बनेगी खिचड़ी, तिथि को...

मकर संक्रांति 2026: एकादशी के संयोग से नहीं बनेगी खिचड़ी, तिथि को लेकर भ्रम, 2 फरवरी से शुरू होंगे मांगलिक कार्य

नए साल 2026 के पहले पर्व मकर संक्रांति को लेकर इस बार लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन 19 वर्षों बाद षटतिला एकादशी का विशेष संयोग बन रहा है। एकादशी होने के कारण इस बार मकर संक्रांति पर परंपरागत खिचड़ी नहीं बनाई जाएगी, जिससे पर्व की परंपराओं में बदलाव देखने को मिलेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल और उससे बनी वस्तुओं का सेवन वर्जित माना जाता है। ऐसे में मकर संक्रांति पर बनने वाली खिचड़ी, जिसमें चावल का उपयोग होता है, इस बार नहीं बन सकेगी। इसे लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति है। कुछ लोग अगले दिन खिचड़ी बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि कई लोग बिना खिचड़ी के ही मकर संक्रांति मनाने का निर्णय ले रहे हैं।

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का समय

श्री बुद्धिबल्लभ पंचांग के संपादक आचार्य पवन पाठक के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्यदेव दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जो सुबह 3 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। ऐसा संयोग 19 वर्षों बाद बन रहा है, जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं।

तिल और साबूदाने से बने व्यंजन होंगे प्रमुख

एकादशी के कारण भले ही खिचड़ी नहीं बनेगी, लेकिन इस दिन तिल से बनी सामग्री और साबूदाने की खिचड़ी का सेवन किया जा सकता है। मकर संक्रांति पर स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन तिल, घी, कंबल और दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। एकादशी होने के कारण भगवान को श्वेत तिल अर्पित करना विशेष पुण्यदायक माना गया है।

मकर संक्रांति से नहीं होंगे शुभ कार्य शुरू

हर वर्ष मकर संक्रांति से शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज के अनुसार, शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मकर संक्रांति से शुभ कार्य आरंभ नहीं किए जाएंगे। शुक्र के उदय के बाद 2 फरवरी 2026 से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत संभव होगी।

इस तरह मकर संक्रांति 2026 धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग लेकर आ रही है, लेकिन तिथि और ग्रह-नक्षत्रों के कारण पर्व की परंपराओं में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments