Monday, October 12, 2026
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चीनी मिलों को गन्ने का क्षेत्रफल बांटने परमंथन

काशीपुर। चीनी मिलों को गन्ने का क्षेत्रफल बांटने के लिए बृहस्पतिवार को गन्ना एवं चीनी आयुक्त कार्यालय में किसान, चीनी मिल और गन्ना आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान किसान चीनी मिल के अधिकार क्षेत्र के बारे में विचार किया गया। किसानों ने समस्या उठाते हुए कहा कि केंद्रों पर घटतौली बंद की जानी चाहिए और किसानों का गन्ना खेत में सूखने की नौबत न आए।
गन्ना आयुक्त कार्यालय के बहुउद्देशीय भवन में हुई बैठक में किसानों ने कहा कि उन्हें हर साल गन्ने की बिक्री के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। दो मुख्य परेशानियों हर साल उनके सामने खड़ी रहती हैं जिनमें एक मुख्य समस्या घटतौली की है। सरकारी गन्ना क्रय क्रेंदों पर गन्ने की घटतौली कर किसान का हक मारा जाता है। किसानों की खून पसीने की कमाई बिचौलिए हजम कर जाते हैं। इस बार ऐसी स्थिति किसी हाल में नहीं बननी चाहिए। इस पर गन्ना आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने मिल संचालकों से कहा कि किसी भी दशा में इस तरह की शिकायत नहीं आनी चाहिए। घटतौली पर पूरी तरह विराम लगाया जाना चाहिए। किसानों ने कहा कि कई बार मिल समय से गन्ना नहीं खरीदती जिसके चलते गन्ना खेतों में सूखने की स्थिति बन जाती है। गन्ना खेतों में सूखने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। बैठक में भारतीय किसान यूनियन टिकैत के प्रदेश अध्यक्ष कर्म सिंह पड्डा, जिला महासचिव बलजिंदर सिंह संधू, काशीपुर ब्लॉक अध्यक्ष टीका सिंह सैनी, विक्की रंधावा, कश्मीर सिंह, कल्याण सिंह ढिल्लो, चौधरी रवि बालियान आदि मौजूद रहे।
बैठने के लिए जगह न होने पर किसानों ने जताया विरोध
काशीपुर। गन्ना आयुक्त कार्यालय में बुलाई गई बैठक में किसानों के खड़े रहने का साथी किसानों ने विरोध किया। अधिकारियों ने बहुउद्देशीय भवन में किसानों की बैठक कराई। गन्ना सुरक्षण को लेकर बृहस्पतिवार को गन्ना एवं चीनी आयुक्त कार्यालय में बैठक बुलाई गई थी। पहले बैठक का आयोजन कांफ्रेंस हाल में किया जाना चाहिए था। किसान हॉल में पहुंचे तो सभी को बैठने के लिए जगह नहीं मिली। किसान नेता बलजिंदर सिंह संधू ने विरोध करते हुए कहा कि किसान दूर-दूर से आए हैं। सभी किसानों को बैठक में हिस्सा लेने का मौका मिलना चाहिए। आधे किसान बैठक में हिस्सा लें और आधे बाहर बैठकर इंतजार करें ऐसा ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भले ही किसी खाली मैदान में बैठक कराई जाए लेकिन अलग से कराई जाए। अगर ऐसा न किया गया तो किसान बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। इसके बाद बहुउद्देशीय भवन में किसानों को बिठाकर बैठक का आयोजन किया गया। इस पर किसान शांत हो गए।

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