Monday, January 19, 2026
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नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित, फैसले के विरोध में चमोली के 484 गांवों की महापंचायत

उत्तराखंड की प्रसिद्ध और आस्था से जुड़ी श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा 2026 को स्थगित किए जाने के निर्णय पर विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के विरोध में रविवार को नंदा नगर ब्लॉक सभागार में चमोली जिले के 484 गांवों की महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, मंदिर समितियों और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया।

नंदा देवी राजजात यात्रा हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली हिमालय की सबसे लंबी पैदल यात्राओं में से एक मानी जाती है। लगभग 280 किलोमीटर लंबी यह यात्रा करीब 20 दिनों तक चलती है। परंपरा के अनुसार यह यात्रा कांसुवा-नौटी से होमकुंड तक जाकर पुनः नौटी लौटती है, जिसे ‘चल महाकुंभ’ भी कहा जाता है।

समिति के निर्णय से नाराज लोग

रविवार को श्रीनंदा देवी राजजात समिति, नौटी ने वर्ष 2026 में प्रस्तावित राजजात को स्थगित करने का निर्णय लिया था। इस फैसले के बाद क्षेत्र में असंतोष फैल गया। इसके विरोध में मां नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति ने कुरुड़ से नंदा की बड़ी जात प्रारंभ करने की मांग उठाई, जिसके समर्थन में महापंचायत बुलाई गई।

महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि नंदा राजजात केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और पर्यटन से भी गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे में यात्रा को स्थगित करने का फैसला जनभावनाओं के विपरीत है।

स्थगन के पीछे बताए गए कारण

श्रीनंदा देवी राजजात समिति के अनुसार, इस वर्ष मलमास होने के कारण कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं। समिति ने बताया कि मलमास के चलते यात्रा सितंबर के अंत तक समाप्त हो रही थी, जिससे यात्रा पूर्ण होने के समय बुग्यालों में बर्फ पड़ने की संभावना रहती। इसके अलावा राजजात के विभिन्न पड़ावों पर अब तक आवश्यक ढांचागत सुविधाएं पूरी नहीं हो पाई हैं।

समिति ने यह निर्णय प्रशासन के पुनर्विचार पत्र और बीते वर्ष अक्टूबर में हुई अध्ययन यात्रा की रिपोर्ट के आधार पर लिया। कर्णप्रयाग में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में समिति के अध्यक्ष एवं कांसुवा के राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में इस पर अंतिम मुहर लगाई गई।

श्रद्धालुओं का इंतजार बढ़ा

बीते तीन वर्षों से समिति की ओर से अगस्त–सितंबर 2026 में राजजात आयोजित करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन अब इसके स्थगन से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का इंतजार और लंबा हो गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि अब वसंत पंचमी के अवसर पर यह तय किया जाएगा कि नंदा देवी राजजात किस वर्ष आयोजित होगी और उसी समय नया कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

फिलहाल, राजजात 2026 को लेकर उठे इस विवाद के बाद प्रशासन और विभिन्न संगठनों की नजर आगे होने वाले निर्णयों पर टिकी हुई है।

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