प्रदेश में बिजली की मांग में तेज उछाल, आपूर्ति कम पड़ने से संकट
उत्तराखंड में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने के कारण प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति बनने लगी है। बाजार में बिजली की भारी किल्लत के चलते राज्य के कई क्षेत्रों में बिजली कटौती शुरू कर दी गई है। पिछले दो दिनों से ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और स्टील फर्नेस उद्योगों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक मार्च को प्रदेश में बिजली की मांग करीब 3.8 करोड़ यूनिट थी, जो लगातार बढ़ते तापमान के साथ बढ़कर बृहस्पतिवार को 4.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई। इसके मुकाबले प्रदेश में उपलब्ध बिजली मात्र करीब 2.3 करोड़ यूनिट ही है, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
यूजेवीएनएल और केंद्रीय पूल से सीमित आपूर्ति
राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं से संचालित यूजेवीएनएल से इस समय करीब 90 लाख यूनिट बिजली मिल रही है। वहीं केंद्रीय पूल से लगभग 1.3 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त हो रही है। इस तरह कुल उपलब्ध बिजली करीब 2.3 करोड़ यूनिट ही रह गई है।
मांग को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को बाजार से करीब 70 लाख यूनिट बिजली खरीदनी पड़ रही है। हालांकि बाजार में भी बिजली की भारी कमी है और इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में ज्यादा असर
बिजली की कमी के कारण हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दो से ढाई घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। वहीं छोटे कस्बों में लगभग एक से डेढ़ घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है।
इसके अलावा स्टील फर्नेस से जुड़े उद्योगों में भी करीब दो घंटे तक बिजली बंद रखी जा रही है, जिससे औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।
गैस संकट से बंद पड़े गैस आधारित पावर प्लांट
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस्राइल-ईरान युद्ध का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण गैस आधारित बिजली संयंत्रों का संचालन प्रभावित हो गया है।
काशीपुर स्थित 214 मेगावाट क्षमता का श्रावंती और गामा कंपनी का गैस आधारित बिजली उत्पादन फिलहाल बंद है। इन संयंत्रों को बिजली उत्पादन के लिए बाजार से गैस खरीदनी होगी, लेकिन वर्तमान में गैस या तो उपलब्ध नहीं है या फिर बहुत महंगे दामों में मिल रही है।
यदि महंगी गैस पर बिजली उत्पादन किया जाता है तो यूपीसीएल को यह बिजली 10 रुपये प्रति यूनिट से भी अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ सकती है।
150 मेगावाट बिजली खरीद पर नियामक आयोग की रोक
यूपीसीएल ने पहले 500 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया था। लेकिन इसमें से 350 मेगावाट बिजली तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं हो पाई। वहीं बाकी 150 मेगावाट बिजली खरीद पर भी फिलहाल नियामक आयोग ने रोक लगा दी है।
जानकारी के अनुसार इस बिजली की खरीद के लिए यूपीसीएल को नियामक आयोग से दोबारा अनुमति लेनी होगी। इस वजह से भी बिजली आपूर्ति बढ़ाने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती मांग के बीच बाजार से बिजली खरीदकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अगर मांग इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गहरा सकता है।