Friday, October 9, 2026
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चंदन की खेती से बदलेगी किसानों की किस्मत, उत्तराखंड में शोध के मिले सकारात्मक नतीजे

उत्तराखंड में किसानों की आय बढ़ाने के लिए चंदन की खेती एक नई और लाभकारी संभावना के रूप में उभरकर सामने आई है। राज्य सगंध पौध केंद्र द्वारा पिछले दस वर्षों से अधिक समय से किए जा रहे शोध में चंदन की खेती को लेकर बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शोध में यह साबित हुआ है कि प्रदेश की जलवायु और मिट्टी चंदन उत्पादन के लिए उपयुक्त है और यहां उगाए गए चंदन की लकड़ी व तेल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है।

सगंध पौध केंद्र की ओर से देहरादून जिले के रानीपोखरी क्लस्टर में प्रयोगात्मक तौर पर करीब 1500 चंदन के पौधे लगाए गए थे। इन पौधों की वृद्धि और पैदावार पर लंबे समय तक अध्ययन किया गया। परिणामस्वरूप यह सामने आया कि चंदन के पेड़ों की ग्रोथ अच्छी रही और उनसे प्राप्त लकड़ी व तेल की गुणवत्ता भी संतोषजनक पाई गई।

केंद्र ने चंदन की लकड़ी और तेल की जांच सेलाकुई स्थित प्रयोगशाला में कराई। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि ट्रायल के तहत उगाए गए चंदन की गुणवत्ता प्राकृतिक रूप से उगने वाले चंदन के समान है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तराखंड में व्यावसायिक स्तर पर चंदन की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।

बाजार में चंदन की भारी मांग

वैज्ञानिकों के अनुसार बाजार में चंदन के तेल की कीमत 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है, जबकि चंदन की लकड़ी 3500 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। यदि कोई किसान एक हेक्टेयर भूमि पर चंदन की खेती करता है, तो अनुमान है कि उसे लकड़ी से करीब तीन करोड़ रुपये और तेल से लगभग 4.4 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। इस लिहाज से चंदन की खेती किसानों के लिए दीर्घकालिक और अत्यंत लाभदायक साबित हो सकती है।

औषधीय, धार्मिक और सुगंधित उत्पादों में उपयोग

चंदन एक अत्यंत सुगंधित और औषधीय गुणों से भरपूर वृक्ष है। इसकी लकड़ी और तेल का उपयोग परफ्यूम, साबुन और अन्य सुगंधित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठानों में हवन, तिलक और पूजा-पाठ में भी चंदन का विशेष महत्व है। चंदन की लकड़ी से माला और मूर्तियां बनाई जाती हैं, जबकि इसकी सुगंध को मानसिक शांति और तनाव कम करने वाला माना जाता है।

प्रदेशभर में बनेगी खेती की रणनीति

सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान के अनुसार, रानीपोखरी क्षेत्र में किए गए शोध से यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड में चंदन का उत्पादन संभव है। अब केंद्र की ओर से उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां चंदन की खेती की बेहतर संभावनाएं हैं। इसके आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसान चंदन की खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें।

चंदन की खुशबू अब केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह उत्तराखंड के किसानों की आर्थिक समृद्धि की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर है।

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