Sunday, October 25, 2026
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उत्तराखंड में गहराया बिजली संकट, मैदानी इलाकों में 4–5 घंटे की कटौती, मांग रोजाना 10 लाख यूनिट बढ़ी

देहरादून। उत्तराखंड में बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की मांग में तेजी से इजाफा हो रहा है, जबकि आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने के कारण प्रदेश के मैदानी जिलों में रोजाना चार से पांच घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है।

ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को राज्य में बिजली की मांग इस महीने के उच्चतम स्तर 4.7 करोड़ यूनिट को पार कर गई। पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन करीब 10 लाख यूनिट बिजली की अतिरिक्त मांग बढ़ रही है, जिससे बिजली व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य को अपने स्रोतों से सीमित बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है। राज्य पूल से लगभग 93 लाख यूनिट और केंद्रीय पूल से करीब 1.5 करोड़ यूनिट बिजली मिली, जिससे कुल उपलब्धता 2.4 करोड़ यूनिट के आसपास रही। शेष मांग को पूरा करने के लिए निगम को खुले बाजार और अन्य माध्यमों से बिजली खरीदनी पड़ी। इसके बावजूद करीब 24 लाख यूनिट की कमी बनी रही, जिसके चलते बिजली कटौती लागू करनी पड़ी।

कटौती का असर सबसे अधिक मैदानी क्षेत्रों में देखने को मिला। हरिद्वार के ग्रामीण इलाकों में करीब साढ़े तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जबकि ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग दो घंटे की कटौती की गई। इसके अलावा लंढौरा, मंगलौर, लक्सर, बहादराबाद, ढकरानी, सेलाकुई, सहसपुर, विकासनगर, डोईवाला, कोटद्वार, ज्वालापुर, जसपुर, किच्छा, खटीमा, रामनगर, गदरपुर और बाजपुर जैसे कस्बों में एक से दो घंटे की घोषित कटौती की गई।

औद्योगिक इकाइयों पर भी इसका असर पड़ा है। स्टील फर्नेश उद्योगों में 10 घंटे से अधिक की बिजली कटौती की गई, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तापमान में बढ़ोतरी के साथ बिजली की मांग और बढ़ सकती है। यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कटौती का समय और बढ़ाया जा सकता है।

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