उत्तराखंड के चंपावत जिले में इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा ‘कॉकरोच पार्टी अभियान’ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। डिजिटल पोस्टर, व्यंग्यात्मक नारों और वायरल तस्वीरों के जरिए चलाया जा रहा यह अभियान अब स्थानीय राजनीति में भी नई बहस को जन्म दे रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर इसकी पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है।
बताया जा रहा है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से चल रहे इस अभियान में कई तरह के व्यंग्यात्मक पोस्टर और स्लोगन साझा किए जा रहे हैं। वायरल हो रहे पोस्टरों में कुछ जनप्रतिनिधियों की तस्वीरों के साथ “मैं हूं कॉकरोच” जैसे नारे लिखे दिखाई दे रहे हैं। शुरुआत में इसे सोशल मीडिया ट्रोलिंग और मजाक के तौर पर देखा गया, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर कुछ जनप्रतिनिधियों और उनके समर्थकों के खुलकर सामने आने से यह अभियान राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।
सोशल मीडिया पर इस अभियान को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा व्यवस्था और पारंपरिक राजनीतिक सोच पर कटाक्ष करने का एक नया तरीका है। उनका मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जनता अपनी नाराजगी और व्यंग्यात्मक विचारों को नए अंदाज में सामने ला रही है।
वहीं विरोधी पक्ष इसे सोशल मीडिया के माध्यम से माहौल तैयार करने और स्थानीय राजनीति को प्रभावित करने की रणनीति बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे अभियानों का उद्देश्य जनमत को प्रभावित करना और राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में मोड़ना हो सकता है।
खेतीखान के सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम बल्लभ ने कहा कि डिजिटल दौर में राजनीति अब केवल चुनावी सभाओं और रैलियों तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया आज जनमत तैयार करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि चंपावत में चल रहा ‘कॉकरोच पार्टी अभियान’ बदलती वर्चुअल राजनीति और डिजिटल राजनीतिक संस्कृति का ताजा उदाहरण माना जा सकता है।
फिलहाल यह अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और जिले में लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के डिजिटल अभियानों का प्रभाव स्थानीय राजनीति में और अधिक देखने को मिल सकता है।