हरिद्वार। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। 91 वर्षीय मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। सेना और पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। उनकी अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ा और बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक तथा सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी पिछले 49 दिनों से देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। मंगलवार सुबह करीब 11:10 बजे उन्हें हल्का कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, एक अप्रैल को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच में उनकी आंतों में रक्तस्राव की समस्या सामने आई थी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। हालांकि लंबे इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया।
उनके निधन की खबर सामने आते ही प्रदेशभर में शोक की लहर फैल गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने हरिद्वार पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बीसी खंडूड़ी का योगदान देश और समाज के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके निधन से देश ने एक अनुशासित सैनिक, ईमानदार प्रशासक और सत्यनिष्ठ राजनेता को खो दिया है।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मंगलवार सुबह देहरादून स्थित बसंत विहार आवास पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में पूर्व सहकर्मी के रूप में बिताए समय को भी याद किया। गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी में देहरादून दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने बीसी खंडूड़ी से मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना था।
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया। भाजपा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने उन्हें सादगी, ईमानदारी और अनुशासन की मिसाल बताया।
बीसी खंडूड़ी भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद पर सेवाएं देने के बाद राजनीति में आए थे। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य में सड़क, शिक्षा और सुशासन को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल की थीं। उन्हें साफ-सुथरी छवि और ईमानदार राजनीति के लिए जाना जाता था।
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर राज्य सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इसके तहत प्रदेशभर में सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। साथ ही राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय एवं निजी स्कूलों और कई सरकारी कार्यालयों को बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है।