Saturday, October 24, 2026
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राष्ट्रीय प्रवासी दिवस: रिवर्स पलायन से बदली गांवों की तस्वीर, स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन रहे प्रवासी उत्तराखंडी

राष्ट्रीय प्रवासी दिवस के मौके पर उत्तराखंड में रिवर्स पलायन की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में वर्षों पहले गांवों से देश-विदेश गए प्रवासी उत्तराखंडी अब अपने पैतृक गांव लौटकर न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रहे हैं। बीते पांच वर्षों में 27 देशों से लौटे 169 प्रवासियों ने अपने अनुभव के आधार पर स्वरोजगार अपनाकर कामयाबी की नई उम्मीद जगाई है।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट-2025 के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य के 13 जिलों में कुल 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इनमें 169 प्रवासी विदेशों से, 4769 देश के अन्य राज्यों से और 1127 अन्य जिलों से वापस आए हैं। आयोग के मुताबिक, प्रदेश सरकार की योजनाओं और नीतिगत प्रयासों के चलते रिवर्स पलायन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

विदेशों से लौटने वाले प्रवासियों में चीन, दुबई, ओमान, भूटान, जांबिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, मॉरीशस, कैलिफोर्निया, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, कतर, नेपाल, कुवैत, कीनिया, मालदीप, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैंड, पोलैंड, रूस, तंजानिया, नाइजीरिया, अबूधाबी सहित कई देशों के प्रवासी शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या टिहरी जिले के प्रवासियों की बताई जा रही है।

गांव लौटे अधिकांश प्रवासियों के पास रोजगार और कारोबार का अच्छा अनुभव था। उन्होंने राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाते हुए अपने अनुभव के अनुसार आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं। रिपोर्ट के अनुसार, रिवर्स पलायन करने वाले प्रवासियों में से 39 प्रतिशत ने कृषि और बागवानी, 21 प्रतिशत ने पर्यटन गतिविधियों और होम-स्टे, 18 प्रतिशत ने पशुपालन, जबकि 6 प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग जैसे व्यवसायों में कदम रखा है।

हर जिले में होगा प्रवासी पंचायत का आयोजन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रिवर्स पलायन को और प्रोत्साहन देने के लिए इस वर्ष प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग इस संबंध में योजना तैयार कर रहा है। इन पंचायतों में गांव लौटे प्रवासियों की सफलता की कहानियों, उनकी समस्याओं और सुझावों पर चर्चा की जाएगी, ताकि भविष्य में रिवर्स पलायन को और मजबूत बनाया जा सके।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी के अनुसार, रिवर्स पलायन कर गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों से राज्य को बड़ा लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी जैसे जिलों में प्रवासी मोटे अनाजों की ऑनलाइन मार्केटिंग कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। आने वाले समय में रिवर्स पलायन को और बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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