देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है। पिछले 17 दिनों के भीतर प्रदेश में बिजली की खपत में करीब एक करोड़ यूनिट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में हीटवेव की चेतावनी जारी किए जाने के बाद ऊर्जा विभाग और यूपीसीएल की चिंता और बढ़ गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मई माह के दौरान बिजली की मांग छह करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है।
अप्रैल महीने में तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग में तेजी आई थी, लेकिन मई की शुरुआत में मौसम सुहावना रहने के कारण मांग घटकर करीब चार करोड़ यूनिट तक पहुंच गई थी। हालांकि बीते कुछ दिनों से प्रदेशभर में तेज गर्मी पड़ने लगी है, जिसके चलते बिजली की खपत फिर तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में प्रदेश में बिजली की मांग 5.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच चुकी है।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में प्रतिदिन करीब 30 लाख यूनिट बिजली की अतिरिक्त मांग बढ़ रही है। यदि आने वाले दिनों में हीटवेव का असर और तेज होता है तो बिजली की मांग छह करोड़ यूनिट तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे हालात में यूपीसीएल के सामने निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।
मांग के मुकाबले सिर्फ 70 फीसदी बिजली उपलब्ध
प्रदेश में बढ़ती खपत के बीच यूपीसीएल को मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। हाल ही में केंद्रीय पूल से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली जरूर मिली है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा रही।
जानकारी के अनुसार, पांच करोड़ यूनिट से अधिक की मौजूदा मांग के मुकाबले यूपीसीएल को राज्य और केंद्रीय पूल से मिलाकर कुल लगभग 3.3 करोड़ यूनिट बिजली ही मिल रही है। इसमें राज्य पूल से करीब 1.3 करोड़ यूनिट और केंद्रीय पूल से लगभग दो करोड़ यूनिट बिजली शामिल है। शेष करीब 30 प्रतिशत बिजली की जरूरत खुले बाजार से खरीदकर पूरी करनी पड़ रही है। इससे यूपीसीएल पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है।
फिलहाल घोषित कटौती नहीं, लेकिन ट्रिपिंग से लोग परेशान
यूपीसीएल प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में कहीं भी घोषित बिजली कटौती नहीं की जा रही है और मांग के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि सोमवार को कई क्षेत्रों में ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या देखने को मिली, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
ऊर्जा निगम का दावा है कि तकनीकी कारणों से कुछ स्थानों पर अस्थायी बाधाएं आईं, लेकिन किसी भी क्षेत्र में योजनाबद्ध कटौती लागू नहीं की गई है।
एसी के साथ इंडक्शन का बढ़ा लोड
इस बार बिजली विभाग के सामने सिर्फ एसी और कूलर का लोड ही चुनौती नहीं बना है, बल्कि इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। देशभर में गैस संकट और महंगे एलपीजी सिलेंडर के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने इंडक्शन चूल्हे खरीद लिए हैं। इससे घरेलू बिजली खपत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है।
यूपीसीएल अधिकारियों का कहना है कि इंडक्शन के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली मांग का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। यदि गर्मी का असर इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।