Thursday, May 21, 2026
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यमुनोत्री धाम में 70 साल पुराने पैदल मार्ग को फिर से जीवित करने की तैयारी, श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत

उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन अब यमुनोत्री धाम के लिए 70 साल पुराने वैकल्पिक पैदल मार्ग को पुनर्जीवित करने की तैयारी में जुट गया है। जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर हर साल बढ़ते दबाव और घंटों लगने वाले जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से खरसाली-गरूड़गंगा पुराने मार्ग को दोबारा विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में यमुनोत्री मंदिर समिति से प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव मिलने के बाद मानसून सीजन समाप्त होते ही लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा पुराने मार्ग का सर्वे कराया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस वैकल्पिक मार्ग के शुरू होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और मुख्य पैदल मार्ग पर भीड़ का दबाव कम होगा।

हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

यमुनोत्री मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल ने बताया कि चारधाम यात्रा में लगातार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसके कारण जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक के पैदल मार्ग पर भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थिति यह हो जाती है कि यात्रियों को कई-कई घंटों तक जाम का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि भीड़ बढ़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना रहता है। ऐसे में पुराने खरसाली-गरूड़गंगा पैदल मार्ग को फिर से शुरू करना बेहद जरूरी हो गया है। इससे श्रद्धालुओं के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।

1968 से पहले इसी मार्ग से होती थी यात्रा

प्रदीप उनियाल के अनुसार वर्ष 1968 से पहले श्रद्धालु इसी खरसाली-गरूड़गंगा मार्ग से यमुनोत्री धाम की यात्रा करते थे। बाद में जानकीचट्टी से नए पैदल मार्ग का निर्माण हुआ, जिसके बाद पुराने रास्ते का उपयोग धीरे-धीरे कम हो गया। समय के साथ इस मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई।

अब प्रशासन और स्थानीय लोगों की मांग पर इस ऐतिहासिक मार्ग को फिर से विकसित करने की कवायद शुरू की जा रही है। यदि यह योजना सफल होती है तो श्रद्धालुओं को यमुनोत्री धाम तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग मार्गों की सुविधा मिल सकेगी।

मानसून के बाद होगा सर्वे

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि इस पुराने मार्ग की जानकारी स्थानीय लोगों द्वारा प्रशासन को दी गई थी। इसके बाद यमुनोत्री मंदिर समिति से विस्तृत प्रस्ताव मांगा गया है। मानसून सीजन के बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा मार्ग का सर्वे कराया जाएगा और इसके पुनर्निर्माण की संभावनाओं पर कार्य शुरू किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भंडेलीगाड से देवदर्शनी तक जाने वाले वैकल्पिक मार्ग का भी सुधारीकरण किया जाएगा। यात्रा को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए पैदल यात्रियों, घोड़ा-खच्चरों और डंडी-कंडी संचालकों के लिए अलग-अलग मार्ग विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

यात्रा प्रबंधन में मिलेगा बड़ा लाभ

प्रशासन का मानना है कि वैकल्पिक मार्ग विकसित होने से न केवल मुख्य मार्ग पर भीड़ कम होगी, बल्कि आपदा या आपात स्थिति में भी यात्रियों को सुरक्षित निकासी का विकल्प मिलेगा। इसके अलावा यात्रा प्रबंधन बेहतर होगा और श्रद्धालुओं को कम समय में धाम तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।

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